RANCHI: झारखंड में मत्स्य पालन को स्वरोजगार का सबसे बड़ा जरिया बनाने के लिए राज्य सरकार ने अपनी कमर कस ली है, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 81.60 करोड़ रुपए खर्च करेगी. इस योजना का लक्ष्य न केवल मछली उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि राज्य के मछुआरों, मत्स्य विक्रेताओं और छोटे उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाना भी है.
हादसे की स्थिति में परिवार को मिलेगा बड़ा संबल
- सरकार ने मछुआरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक बेहद खास बीमा योजना को इस बजट में शामिल किया है.
- आकस्मिक मृत्यु या पूर्ण विकलांगता: सक्रिय मछुआरे की मृत्यु या पूरी तरह अपंग होने पर परिवार को पांच लाख रुपए की बीमा राशि मिलेगी.
- आंशिक विकलांगता: स्थाई रूप से आंशिक अपंगता होने पर ढ़ाई लाख की आर्थिक मदद दी जाएगी.
- अस्पताल का खर्च: इसके अलावा, इलाज के लिए 25 हजार तक के हॉस्पिटलाइजेशन एक्सपेंस की सुविधा दी जाएगी.
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सब्सिडी के साथ अब स्टेट टॉप-अप का भी लाभ
केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता के अलावा, राज्य सरकार अपनी ओर से 6.60 करोड़ की टॉप-अप सहायता देगी, ताकि लाभार्थियों पर आर्थिक बोझ कम हो सके. इस योजना का लाभ उठाने के लिए जिला स्तरीय समिति की स्वीकृति अनिवार्य होगी.
किसे मिलेगा लाभ
- प्रगतिशील मत्स्य किसान और मछुआरे.
- रंगीन (ऑर्नामेंटल) मछली पालने वाले.
- मछली विक्रेता और इस क्षेत्र से जुड़े छोटे उद्यमी.
कहां से आएगा पैसा
कुल 81.60 करोड़ के इस बजट को तीन हिस्सों में बांटा गया है
- केन्द्रांश -45 करोड़
- राज्यांश-36.60 करोड़
- स्टेट टॉप-अप-6.60 करोड़
