गुमला में तपती गर्मी का कहर, मरीजों की संख्या बढ़ी

Gumla: झारखंड में हर सरकार व्यवस्था सुधारने के लिए बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर कुछ और ही कहानी बयां...

Gumla: झारखंड में हर सरकार व्यवस्था सुधारने के लिए बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर कुछ और ही कहानी बयां करती है. गुमला जिले में पड़ रही भीषण गर्मी ने आम जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है, जहां स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है.

भीषण गर्मी का असर, जनजीवन अस्त-व्यस्त

गुमला जिले में अप्रैल महीने से ही जिस तरह की भीषण गर्मी पड़ रही है, उससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है. तापमान लगभग 40 डिग्री के आसपास पहुंच चुका है, जिसके कारण लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है. सड़कों पर दोपहर के समय सन्नाटा पसरा रहता है और लोग जरूरी काम के अलावा बाहर निकलने से बच रहे हैं.

अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

गर्मी के बढ़ते प्रकोप का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी साफ दिख रहा है. सदर अस्पताल में लू और डिहाइड्रेशन से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. डॉक्टरों के अनुसार, लू लगने के मामले अब सामान्य होते जा रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ गई है.

प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

जिला उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने लोगों से अपील की है कि वे अत्यधिक गर्मी में सावधानी बरतें. उन्होंने कहा कि बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें और अगर निकलें तो पूरी सुरक्षा के साथ निकलें. साथ ही सदर अस्पताल को निर्देश दिया गया है कि सभी मरीजों का समुचित इलाज सुनिश्चित किया जाए.

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पर्यावरण असंतुलन बना बड़ी वजह

स्थानीय निवासी अजय किशोर नाथ पांडे के अनुसार, इस तरह की गर्मी पहले कभी देखने को नहीं मिली. उन्होंने बताया कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ इसके पीछे मुख्य कारण है. पहले गुमला क्षेत्र में घने जंगल हुआ करते थे, जिससे तापमान संतुलित रहता था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है.

सड़क निर्माण और पेड़ों की कटाई पर सवाल

उन्होंने यह भी कहा कि सड़क निर्माण के दौरान हजारों पेड़ों को काट दिया गया, लेकिन उसके अनुपात में पौधारोपण नहीं किया गया. इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ा है. उन्होंने केंद्रीय मंत्री से अपील की कि सड़क निर्माण के साथ-साथ पौधारोपण को भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए.

डॉक्टरों की सलाह: सतर्क रहें, सुरक्षित रहें

सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने लोगों को सलाह दी है कि गर्मी में खाली पेट या बिना सुरक्षा के बाहर न निकलें. अधिक से अधिक पानी पिएं और तरल पदार्थों का सेवन करें. मजदूरों को खासतौर पर सुबह और शाम के समय काम करने की सलाह दी गई है.

बच्चों और मजदूरों पर सबसे ज्यादा असर

इस भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों और मजदूरों पर पड़ रहा है. बच्चे स्कूल से लौटते समय तेज धूप के कारण परेशान हो रहे हैं, वहीं मजदूरों को काम करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई बच्चे गर्मी की चपेट में आकर बीमार भी पड़ रहे हैं.

राहत के लिए लोगों की अपील

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गर्मी को देखते हुए बच्चों के लिए राहत भरे कदम उठाए जाएं. वहीं लोग शरबत, सत्तू और अन्य पेय पदार्थों का सेवन कर खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं.

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