रानी कुमारी सिंह: रात में निकलकर लावारिस पशुओं को खिलाती हैं खाना, गुमला में बनीं मिसाल

Gumla: आज की भागती-दौड़ती दुनिया में लोग जहां अपने सगे-संबंधियों के प्रति भी सहयोग की भावना नहीं रख पाते, वहीं अधिकतर लोग...

Gumla: आज की भागती-दौड़ती दुनिया में लोग जहां अपने सगे-संबंधियों के प्रति भी सहयोग की भावना नहीं रख पाते, वहीं अधिकतर लोग अपने छोटे से परिवार तक सीमित होते जा रहे हैं–“मैं, मेरी पत्नी और मेरे बच्चे” तक. लेकिन इन सब के बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो समाज में इंसानियत की एक अलग मिसाल पेश करते हैं. उन्हीं में से एक हैं गुमला जिला की रहने वाली रानी कुमारी सिंह, जो अपने कार्यों से लगातार चर्चा में बनी हुई हैं.

रात में शुरू होती है सेवा

रानी कुमारी सिंह कई सामाजिक कार्यों से जुड़ी रही हैं, लेकिन उनका एक कार्य उन्हें एक अलग पहचान दिला रहा है. वह नियमित रूप से लावारिस पशुओं को भोजन कराती हैं. रात के समय, जब लोग अपने घरों में आराम से सो रहे होते हैं, तब यह महिला रात करीब 10 बजे बाल्टी में भोजन लेकर निकलती हैं और शहर के विभिन्न स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाती हैं.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका लगाव इन पशुओं से इतना गहरा हो गया है कि अब वे भी उनके आने का इंतजार करते हैं. मानो उनके बीच एक भावनात्मक रिश्ता बन गया हो. खासकर जो पशु लाचार होते हैं या जिनके छोटे-छोटे बच्चे होते हैं, उनके प्रति उनका विशेष स्नेह देखने को मिलता है. आसपास के क्षेत्रों में ऐसे पशुओं को चिन्हित कर वे उन्हें नियमित रूप से भोजन कराती हैं, जिसके कारण गुमला में यह चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग उनके कार्यों की जमकर सराहना करते हैं.

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एक घटना ने बदली जिंदगी

उनके इस कार्य में उनकी सहयोगी सरस्वती देवी भी उनका साथ देती हैं. रानी कुमारी सिंह बताती हैं कि उनके जीवन में पहले इस तरह का कोई अनुभव नहीं था. लेकिन एक घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. उनके घर के पास एक कुत्ते ने बच्चों को जन्म दिया, जिसके कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई. इसके बाद मासूम पिल्ले लावारिस होकर इधर-उधर भटकने लगे, जिनमें से दो की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई. इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया.

इसके बाद उन्होंने बचे हुए दो पिल्लों को अपने साथ रखना शुरू किया और वहीं से उनके इस सेवा कार्य की शुरुआत हुई. पिछले लगभग 4 वर्षों से वह लगातार इन पशुओं की सेवा करती आ रही हैं. उनका कहना है कि इस कार्य को करने से उन्हें मानसिक शांति और सुकून मिलता है, और वे ईश्वर से प्रार्थना करती हैं कि उन्हें हमेशा इस सेवा को जारी रखने का आशीर्वाद मिलता रहे.

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घर के बाहर भी व्यवस्था

रानी कुमारी सिंह ने अपने घर के बाहर भी पशुओं के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था कर रखी है, जहां कई पशु आकर भोजन करते हैं. रात के समय तो ऐसा लगता है मानो जैसे कोई बच्चा अपनी मां का इंतजार करता है, ठीक उसी तरह ये पशु भी उनके आने का इंतजार करते हैं. जब पूरा शहर सो रहा होता है, तब उनका यह सेवा कार्य शुरू होता है.

समाज के लिए प्रेरणा

हालांकि इस कार्य को जहां कई लोग सराहते हैं, वहीं कुछ लोग इसे पसंद भी नहीं करते. लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि रानी कुमारी सिंह द्वारा किया जा रहा यह कार्य किसी पूजा से कम नहीं है. उनके अनुसार, पशु-पक्षियों की सेवा करना भी ईश्वर की सच्ची उपासना है.

रानी कुमारी सिंह कहती हैं कि अगर हर व्यक्ति के अंदर पशुओं के प्रति थोड़ी सी भी संवेदना आ जाए, तो सड़कों पर कोई भी पशु भूखा नहीं रहेगा. इस कार्य में उनके पति और उनकी बेटी एंजेल कुमारी भी पूरा सहयोग करती हैं. मां-बेटी मिलकर जिस तरह से लावारिस पशुओं की सेवा कर रही हैं, वह समाज के लिए एक प्रेरणा बन चुका है.

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लोगों का कहना है कि उनके इस कार्य को देखकर उन्हें भी प्रेरणा मिली है और वे भी कभी-कभी इन पशुओं को भोजन कराने का प्रयास करते हैं. रानी कुमारी सिंह का मानना है कि अगर हर व्यक्ति के भीतर इस तरह की भावना जाग जाए, तो समाज की तस्वीर बदल सकती है.

उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि कुत्ते काट लेते हैं, लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि कई बार भूख के कारण ही पशु आक्रामक हो जाते हैं. ऐसे में यदि उन्हें समय पर भोजन मिल जाए, तो ऐसी घटनाओं में कमी आ सकती है.

प्रशासन से अपील

रानी कुमारी सिंह ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि लावारिस पशुओं के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, खासकर भीषण गर्मी के दिनों में. उन्होंने कहा कि जब इंसान घर में रहकर भी बिना भोजन और पानी के नहीं रह सकता, तो बाहर रहने वाले पशु-पक्षियों की स्थिति कितनी कठिन होती होगी, यह सहज ही समझा जा सकता है.

अंत में उन्होंने एक भावुक संदेश देते हुए कहा कि हम अपने आप को इंसान तो कहते हैं, लेकिन जब इंसानियत दिखाने का अवसर आता है, तो अक्सर पीछे हट जाते हैं. यदि हम पशु-पक्षियों को भूखा छोड़कर ईश्वर को प्रसाद चढ़ाते हैं, तो उसका महत्व कम हो जाता है. इसके बजाय यदि हम इन जीवों की सेवा करें, तो उससे बड़ा पुण्य और कुछ नहीं हो सकता.

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