Gumla: चैनपुर प्रखंड के कुरूमगढ़ थाना क्षेत्र में हुई दो अलग-अलग जघन्य घटनाओं का पुलिस ने खुलासा करते हुए एक नाबालिक सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. इन घटनाओं ने न सिर्फ इलाके में सनसनी फैलाई, बल्कि यह भी दिखाया कि किस तरह नशा और डर अपराध को जन्म देते हैं, जबकि समय पर की गई पुलिस कार्रवाई पीड़ितों के लिए राहत बनती है.
नाबालिग से दुष्कर्म का मामला
पहला मामला एक 15 वर्षीय नाबालिग किशोरी से जुड़ा है, जो एक पारिवारिक शादी समारोह में शामिल होने के लिए अपने रिश्तेदार के घर आई थी. इसी दौरान गांव के दो युवकों ने अंधेरे का फायदा उठाकर उसे जबरन पकड़ लिया और सुनसान पहाड़ी इलाके में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया. घटना के बाद आरोपियों ने उसे देर रात छोड़ दिया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी. धमकी और भय के कारण किशोरी कुछ समय तक चुप रही, लेकिन अंततः उसने साहस दिखाते हुए अपने परिवार को घटना की जानकारी दी. इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा. कुरूमगढ़ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सकरा गांव निवासी नवरत्न दास (32) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि दूसरे आरोपी, जो नाबालिग है, को बाल सुधार गृह भेजा गया. वही पीड़िता का मेडिकल परीक्षण सदर अस्पताल में कराया गया है और मामले की जांच जारी है.
बुजुर्ग की हत्या का मामला
दूसरी घटना इसी थाना क्षेत्र के लुरु गांव की है, जहां बुधवार की रात दो अपराधियों ने घर में घुसकर 75 वर्षीय शिबू उरांव की गला दबाकर हत्या कर दी. इस दौरान उनकी पत्नी धानो देवी के साथ भी मारपीट की गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं. उनका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है. इस मामले में पुलिस ने लुरु गांव निवासी वैशाखू मुंडा (34) और बालकिशुन मुंडा (32) को गिरफ्तार किया है. पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे शादी समारोह में अत्यधिक शराब के सेवन के कारण नशे में थे और उसी हालत में उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया. कुरूमगढ़ थाना प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि दोनों मामलों में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. उन्होंने बताया कि दुष्कर्म के मामले में शामिल आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया है, वहीं हत्या के आरोपियों ने भी नशे की हालत में घटना को अंजाम देने की बात कबूल की है.
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पुलिस की त्वरित कार्रवाई
शनिवार को दोपहर करीब 12 बजे चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच भय और आक्रोश का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. यह घटनाएं समाज के सामने कई सवाल खड़े करती हैं–क्या नशे पर नियंत्रण की जरूरत और सख्त नहीं होनी चाहिए? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है? फिलहाल, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से यह जरूर संकेत मिला है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन सतर्क है.
