Newswave Desk: भारतीय राजनीति के इतिहास में चार मई बड़े उलटफेरों और नए युग के उदय के रूप में दर्ज हो गया है. बंगाल से लेकर केरल और तमिलनाडु से लेकर असम तक,चुनावी नतीजों ने स्थापित सियासी किलों को ढहाकर एक नई इबारत लिख दी है. जहां बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है, वहीं तमिलनाडु में ‘थलापति’ विजय की पार्टी टीवीके ने दशकों पुराने द्रविड़ वर्चस्व को हिलाकर रख दिया है. यह परिणाम न केवल क्षेत्रीय समीकरण बदलेंगे, बल्कि 2029 की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय करेंगे.
बंगाल में ‘खेला’ खत्म, बीजेपी बम-बम
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के अभेद्य दुर्ग में बीजेपी ने सेंध नहीं, बल्कि सीधे कब्ज़ा कर लिया है. शुरुआती रुझानों और परिणामों में बीजेपी 150 के जादुई आंकड़े को पार कर ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प की ओर बढ़ रही है. एंटी-इंकंबेंसी और ध्रुवीकरण की लहर के बीच पहली बार राज्य में भगवा परचम लहराने के लिए तैयार है. टीएमसी का ‘खेला’ इस बार खुद उसी पर भारी पड़ता नज़र आ रहा है.
तमिलनाडु में टीवीके की आंधी
सबसे बड़ा चमत्कार तमिलनाडु में देखने को मिला है. अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने डीएमके और एआईएडीएमके के 50 साल पुराने एकाधिकार को चुनौती देते हुए 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर सबको चौंका दिया है. विजय की ‘व्हिसल पोडू’ पॉलिटिक्स ने युवाओं और तटस्थ वोटरों को अपनी ओर खींचकर राज्य में तीसरे विकल्प की सफल स्थापना कर दी है.
केरल वाम मुक्त और असम में बीजेपी की हैट्रिक
केरल: ‘गॉड ओन कंट्री’ में वामपंथ का आखिरी किला भी ढहता दिख रहा है. सत्ता विरोधी लहर ने पिनाराई विजयन के तीसरे कार्यकाल के सपने को तोड़ दिया है, जहां कांग्रेस नीत यूडीएफ बहुमत की ओर है.
असम: मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी ने विकास और सुरक्षा के नाम पर शानदार वापसी की है. यहां बीजेपी गठबंधन हैट्रिक लगाकर अपनी पकड़ और मजबूत कर चुका है.
