झारखंड के अस्पतालों में नहीं होगी बिजली गुल, बिजली कटौती पर फुल स्टॉप, अंडरग्राउंड केबल से ऑपरेशन थिएटर तक दौड़ेगी सीधी पावर

Ranchi: राज्य के सरकारी अस्पतालों में अब बिजली गुल होने की वजह से न तो इलाज रुकेगा और न ही ऑपरेशन थिएटर...

Ranchi: राज्य के सरकारी अस्पतालों में अब बिजली गुल होने की वजह से न तो इलाज रुकेगा और न ही ऑपरेशन थिएटर में अंधेरा छाएगा. राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं की लाइफलाइन यानी बिजली आपूर्ति को अभेद्य बनाने के लिए पावर प्लान तैयार किया है.

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सीधी लाइन और डबल फीडर का सुरक्षा कवच

अपर मुख्य सचिव सह विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के चिकित्सा बुनियादी ढांचे को लेकर कड़े फैसले लिए गए. बैठक का सबसे अहम हिस्सा अस्पतालों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित करना रहा.

ये लिए गए निर्णय

अंडरग्राउंड कनेक्टिविटी: अब तूफान या भारी बारिश भी अस्पतालों की बत्ती गुल नहीं कर पाएगी. सभी सदर, अनुमंडलीय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को अंडरग्राउंड केबल के जरिए सीधी लाइन से जोड़ा जाएगा.
फूल प्रूफ सिस्टम: सदर अस्पतालों में अब एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग फीडर से बिजली आएगी. अगर तकनीकी खराबी के कारण एक फीडर बंद होता है, तो दूसरा तुरंत मोर्चा संभाल लेगा.

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संवेदनशील विभागों के लिए स्पेशल बैकअप

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि इमरजेंसी सेवाओं के साथ कोई समझौता नहीं होगा. ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी और एसएनसीयू जैसे अति-संवेदनशील विभागों के लिए अलग-अलग यूपीएस आधारित बैकअप होगा. निर्देश दिया गया है कि ओटी का पावर बैकअप स्वतंत्र होगा, ताकि सर्जरी के दौरान एक सेकंड का भी पावर लैप्स न हो.

5 साल का नो टेंशन कॉन्ट्रैक्ट

अस्पतालों में जनरेटर सेट धूल न फांकें और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्टार्ट हों, इसके लिए 5 साल का वार्षिक अनुरक्षण अनुबंध अनिवार्य कर दिया गया है. यानी अब मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी एजेंसी की होगी, जिससे निर्बाध बिजली सुनिश्चित की जा सकेगी. अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि अस्पतालों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति महज सुविधा नहीं, बल्कि मरीजों का अधिकार है. ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग आपसी तालमेल से इन निर्देशों को तत्काल जमीन पर उतारें. इस बैठक में ऊर्जा सचिव के. निवासन सहित स्वास्थ्य और बिजली विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद थे.

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