कुल अपराध घटे, लेकिन गुमशुदा बच्चे, मानव तस्करी और रेलवे अपराध ने बढ़ाई चिंता
Ranchi: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी वर्ष 2024 के ताजा अपराध आंकड़ों ने झारखंड की कानून-व्यवस्था की बदलती तस्वीर सामने रखी है. राज्य में एक ओर कुल संज्ञेय अपराधों में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक धोखाधड़ी, जालसाजी, बैंक फ्रॉड, गुमशुदगी, मानव तस्करी और रेलवे क्षेत्र से जुड़े अपराध बढ़े हैं.
एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में वर्ष 2022 में कुल 48,726 संज्ञेय मामले दर्ज हुए थे, जो 2023 में बढ़कर 50,187 पहुंच गए, हालांकि 2024 में यह आंकड़ा घटकर 47,250 रह गया. लेकिन अपराध की प्रकृति अब तेजी से बदल रही है. पारंपरिक अपराधों की तुलना में आर्थिक अपराध और संगठित नेटवर्क आधारित अपराध पुलिस के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं.
सबसे अधिक चिंता आर्थिक अपराधों में तेज उछाल को लेकर है. वर्ष 2024 में धोखाधड़ी के 1,927 मामले और जालसाजी के 535 मामले दर्ज किए गए हैं. जबकि 2023 में धोखाधड़ी के 1,630 और जालसाजी के 460 मामले सामने आए थे. बैंकिंग फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपराधियों के सक्रिय नेटवर्क ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.
हत्या में कमी, लेकिन स्थिति अब भी गंभीर
राज्य में हत्या के मामलों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है. 2024 में हत्या के 1,472 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 1,581 थी. प्रति लाख आबादी पर हत्या की दर 3.7 दर्ज की गई है. हालांकि गिरावट के बावजूद झारखंड अब भी गंभीर हिंसक अपराध वाले राज्यों में शामिल माना जा रहा है.
गुमशुदा बच्चों ने बढ़ाई चिंता
एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में झारखंड से 1,042 बच्चे लापता हुए, जिनमें 639 लड़कियां शामिल हैं. यह आंकड़ा राज्य की बाल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
हालांकि पुलिस ने पुराने मामलों सहित कुल 2,262 लोगों को खोज निकालने का दावा किया है, लेकिन लगातार बढ़ती गुमशुदगी की घटनाएं प्रशासन और समाज दोनों के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इन मामलों का संबंध बाल श्रम, मानव तस्करी और साइबर शोषण नेटवर्क से भी जुड़ सकता है.
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मानव तस्करी: झारखंड पर अब भी बड़ा दाग
मानव तस्करी के मामलों में भी झारखंड की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स ने 2024 में कुल 97 मामले दर्ज किए हैं. इन मामलों में 282 पीड़ितों की पहचान हुई, जिनमें 185 पुरुष और 97 महिलाएं शामिल हैं.
सबसे भयावह तथ्य यह है कि पीड़ितों में 208 बच्चे शामिल हैं. इनमें 158 लड़के और 50 लड़कियां हैं. यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में बाल तस्करी का नेटवर्क अब भी सक्रिय है और ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इसके सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं.
रेलवे क्षेत्र बना अपराधियों का नया ठिकाना
रेलवे पुलिस के अधिकार क्षेत्र में अपराधों में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वर्ष 2023 में रेलवे क्षेत्र में 745 मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 1,058 पहुंच गए. ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर चोरी, लूट, मोबाइल स्नैचिंग और यात्री अपराधों में वृद्धि ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है. बढ़ती यात्री संख्या के मुकाबले निगरानी और सुरक्षा तंत्र कमजोर पड़ता दिख रहा है.
SC-ST अत्याचार मामलों में कमी, लेकिन जांच पर सवाल
रिपोर्ट के अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अपराधों में कमी दर्ज की गई है. 2024 में एससी के खिलाफ 566 और एसटी के खिलाफ 260 मामले दर्ज हुए हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में कम हैं. हालांकि इन मामलों में कम चार्जशीट दर चिंता का विषय बनी हुई है. जानकारों का कहना है कि समय पर जांच पूरी नहीं होने से पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है.
लंबित मामलों का पहाड़, पुलिस व्यवस्था पर बड़ा दबाव
एनसीआरबी रिपोर्ट में सबसे गंभीर तस्वीर जांच व्यवस्था को लेकर सामने आई है. झारखंड पुलिस की चार्जशीट दर केवल 64.8 प्रतिशत दर्ज की गई है, जिसे राष्ट्रीय औसत की तुलना में कमजोर माना जा रहा है. साल के अंत तक राज्य में 55,681 मामले लंबित रहे. बड़ी संख्या में मामलों का लंबित रहना यह संकेत देता है कि पुलिस बल पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है और जांच तंत्र संसाधनों की कमी से जूझ रहा है.
