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झामुमो ने बाबूलाल मरांडी पर साधा निशाना, बिहार मंत्रिमंडल में आदिवासियों के ‘शून्य प्रतिनिधित्व’ पर उठाए सवाल

Ranchi: झारखंड की सियासत में आदिवासी अस्मिता के मुद्दे पर एक बार फिर घमासान तेज हो गया है. झामुमो ने तंज कसते...

Ranchi: झारखंड की सियासत में आदिवासी अस्मिता के मुद्दे पर एक बार फिर घमासान तेज हो गया है. झामुमो ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या बाबूलाल मरांडी बिहार में आदिवासियों के साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ एक पत्र लिखने की हिम्मत जुटा पाएंगे? पार्टी ने स्पष्ट कहा कि बिहार में लाखों की आबादी होने के बावजूद मंत्रिमंडल में एक भी आदिवासी चेहरा शामिल नहीं है. यह न केवल समावेशी बिहार के दावे की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भाजपा-जदयू गठबंधन के लिए आदिवासी समाज महज एक वोट बैंक बनकर रह गया है.

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प्रतिनिधित्व नहीं, तो सम्मान कैसा

झामुमो ने कहा कि समान भागीदारी हमारा अधिकार है, किसी की कृपा नहीं. जब निर्णय लेने वाली कैबिनेट से ही आदिवासी गायब हैं, तो विकास के दावे खोखले हैं. झामुमो ने नारा बुलंद किया कि ‘प्रतिनिधित्व दो-सम्मान दो’, क्योंकि अब आदिवासी समाज अपने अधिकारों के लिए और इंतजार नहीं करेगा.

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