कुपोषण के खिलाफ हजारीबाग की जंग: एमटीसी केंद्रों में बच्चों को मिल रहा नया जीवन

Hazaribagh: जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन निरंतर सक्रिय है. वर्तमान में जिले के विभिन्न पोषण पुनर्वास केंद्रों...

Hazaribagh: जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन निरंतर सक्रिय है. वर्तमान में जिले के विभिन्न पोषण पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से कुपोषित बच्चों को न केवल समुचित उपचार मिल रहा है, बल्कि उनके पोषण स्तर में सुधार के लिए विशेषज्ञ निगरानी भी सुनिश्चित की जा रही है.

बेड ऑक्यूपेंसी की वर्तमान स्थिति

7 मई 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, जिले के चारों एमटीसी केंद्रों में बच्चों का उपचार जारी है:

MTC सदर: 20 में से 17 बेड भरे हुए (03 रिक्त).
MTC बरकागांव: 10 में से 10 बेड भरे हुए (पूर्ण क्षमता).
MTC बिष्णुगढ़: 10 में से 10 बेड भरे हुए (पूर्ण क्षमता).
अनुमंडलीय अस्पताल बरही: 10 में से 07 बेड भरे हुए (03 रिक्त).

निशुल्क इलाज और माताओं को प्रोत्साहन राशि

एमटीसी केंद्रों में भर्ती बच्चों को 15 से 20 दिनों तक रखा जाता है, जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार उन्हें पोषणयुक्त आहार और दवाइयां निशुल्क दी जाती हैं. बच्चों के साथ रहने वाली माताओं को उनकी मजदूरी के नुकसान की भरपाई के लिए 130 रुपये प्रतिदिन की दर से क्षतिपूर्ति राशि दी जा रही है. साथ ही, माताओं को पोषण संबंधी परामर्श भी दिया जा रहा है ताकि वे भविष्य में बच्चों की बेहतर देखभाल कर सकें.

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ऐसे होती है पहचान

जिले की एएनएम, आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से मध्यम तीव्र कुपोषण और गभीर तीव्र कुपोषण से ग्रसित बच्चों की पहचान की जाती है. वजन, लंबाई और बाहु परिधि मापने के बाद विशेषज्ञों के परामर्श पर उन्हें भर्ती किया जाता है.

जिला जनसंपर्क पदाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन कुपोषण मुक्त हजारीबाग के लक्ष्य हेतु प्रतिबद्ध है. एमटीसी केंद्रों में 24×7 एएनएम की ड्यूटी लगाई गई है ताकि बच्चों की सतत निगरानी हो सके. आमजनों से अपील है कि कुपोषण के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें.

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