Ranchi/ Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को झारखंड में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया है कि वह सहायक शिक्षक और सहायक आचार्य के पदों पर 50 प्रतिशत आरक्षित रिक्तियों के लिए विशेष रूप से पारा शिक्षकों को आवेदन आमंत्रित करने के लिए अधिसूचना जारी करे. सुनील कुमार यादव सहित अन्य पारा शिक्षकों की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही पारा शिक्षक सीधे नियमितीकरण के हकदार नहीं हैं लेकिन उन्हें मौजूदा भर्ती नियमों के तहत भागीदारी और विचार का पूरा अधिकार है. शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह हर शैक्षणिक वर्ष में पैरा शिक्षकों के लिए आरक्षित 50% रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूरी करे. वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के लिए राज्य को 4 सप्ताह के भीतर रिक्तियों का निर्धारण करने और विज्ञापन जारी होने के 10 सप्ताह के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है. सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि झारखंड के 24 जिलों में लगभग 1.5 लाख सहायक शिक्षकों की कमी है. सर्व शिक्षा अभियान (SSA) के तहत प्राथमिक स्कूलों के लिए 83,595 और उच्च प्राथमिक के लिए 37,133 पद स्वीकृत हैं. राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि अब तक 7,300 से अधिक पैरा शिक्षक मौजूदा नियमों के तहत नियुक्त हो चुके हैं जिनमें से 3,304 आरक्षित श्रेणी और 3,997 ओपन श्रेणी के माध्यम से चयनित हुए.
SC का बड़ा फैसला -सहायक आचार्य नियुक्ति में 50 प्रतिशत पारा शिक्षकों की भर्ती करे, झारखंड सरकार को दिया निर्देश
Ranchi/ Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को झारखंड में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए...
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