बच्चों के लापता होने की घटनाएं बढ़ने के बाद भी, आखिर सतर्क क्यों नहीं हो रहे माता-पिता?

Prerna Prabha Ranchi: रांची शहर इन दिनों एक बेहद गंभीर और दर्दनाक सवाल से जूझ रहा है, आखिर छोटे-छोटे बच्चे अचानक कैसे...

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Ranchi: रांची शहर इन दिनों एक बेहद गंभीर और दर्दनाक सवाल से जूझ रहा है, आखिर छोटे-छोटे बच्चे अचानक कैसे गायब हो जा रहे हैं? धुर्वा, हटिया, रातू और रेलवे स्टेशनों के आसपास से बच्चों के गायब होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. कई मामलों में बच्चे मिल गए, लेकिन कुछ अब तक लापता हैं. इसके बावजूद शहर में अभिभावकों की सतर्कता उस स्तर तक नहीं पहुंची, जिसकी आज जरूरत है. जनवरी 2026 में धुर्वा इलाके से 4 और 5 साल के दो भाई-बहन बिस्किट लेने निकले और फिर वापस नहीं लौटे. इस घटना ने पूरे रांची को झकझोर दिया. पुलिस ने SIT बनाई, 17 हजार थानों को अलर्ट किया, इनाम घोषित हुआ, इसके बाद रांची पुलिस ने बच्चों को बरामद कर लिया लेकिन सवाल वहीं रहा इतने छोटे बच्चों को अकेले बाहर क्यों भेजा गया? 

इसके बाद भी लगातार हुई घटनाएं 

इन दोनों बच्चों के मिल जाने के अगले दिन ही खबर मिली की बरियातू से एक और बच्चा गायब हो गया है. इसके बाद अभी कुछ दिनों पहले एक और खबर आई कि 18 महीने की अदीती भी गायब है. इन सब मामलों में सवाल यह है कि आखिर बच्चे कैसे गायब हो रह हैं? क्या मां-बाप अपनी लापरवाही के कारण बच्चों को खो रहे हैं.  

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आखिर लापरवाही क्यों जारी है?

1. “हमारे साथ ऐसा नहीं होगा” वाली मानसिकता

रांची के कई मोहल्लों और बस्तियों में अब भी यह सोच गहरी है कि “इलाका सुरक्षित है”, “बच्चा थोड़ी दूर ही जा रहा है”, “सब लोग जानते हैं”. यही भरोसा कई बार सबसे बड़ी गलती बन जाता है. धुर्वा के मामले में भी बच्चे घर से पास की दुकान तक ही गए थे. परिवार को लगा कुछ मिनट में लौट आएंगे. लेकिन वही कुछ मिनट जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन गए.

2. गरीबी और रोजगार की मजबूरी

रांची की झुग्गी-बस्तियों और मजदूर परिवारों में माता-पिता अक्सर काम में व्यस्त रहते हैं. कई परिवारों में पिता दिहाड़ी पर और मां घरेलू कामों में लगी रहती हैं. ऐसे में बच्चों पर लगातार नजर रखना संभव नहीं हो पाता. रिपोर्टों के मुताबिक धुर्वा के लापता बच्चों का परिवार भी बिहार से रोजगार की तलाश में रांची आया था और बेहद साधारण परिस्थितियों में रह रहा था.

3. मोबाइल और “डिजिटल भरोसा”

आज कई अभिभावक यह मानकर चलते हैं कि बच्चा फोन इस्तेमाल कर लेता है, रास्ता जानता है, इसलिए सुरक्षित है. लेकिन अपराधी बच्चों की मासूमियत और भरोसे का फायदा उठाते हैं. सोशल मीडिया और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म पर भी लोग अब बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं. कुछ लोग बच्चों के लिए GPS या ट्रैकिंग डिवाइस तक की बात कर रहे हैं.

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4. बच्चों से बातचीत की कमी

रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में बच्चे घर से डांट, दबाव या पारिवारिक तनाव की वजह से भाग जाते हैं. 2025 में रांची रेल मंडल के स्टेशनों से 149 बच्चों को बचाया गया. अधिकारियों के अनुसार अधिकांश बच्चे माता-पिता की डांट या आर्थिक परेशानियों के कारण घर छोड़कर निकले थे. यह आंकड़ा बताता है कि सिर्फ बाहरी खतरा ही नहीं, घर का माहौल भी बच्चों को असुरक्षित महसूस करा सकता है.

 

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