Bokaro: बोकारो एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों के संचालन को लेकर चल रही बाधाएं अब जल्द खत्म होंगी. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 12 मई को होने वाली हाई-लेवल कमेटी की बैठक इस दिशा में गेम चेंजर मानी जा रही है. यह बैठक न केवल तकनीकी अड़चनों को दूर करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि बोकारो के रनवे से पहला यात्री विमान कब उड़ान भरेगा.
लाइसेंस और सुरक्षा पर रहेगा फोकस
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में नागरिक उड्डयन विभाग, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और जिला प्रशासन के आला अधिकारी शामिल होंगे. बैठक का मुख्य फोकस नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को गति देना है. इसके अलावा एयरपोर्ट के आसपास के पेड़ों की कटाई, बिजली के खंभों को शिफ्ट करने और सुरक्षा मानकों पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है.

Also Read: वायरल वीडियो मामले में HC ने धनबाद पुलिस से पूछा – जांच कहां तक पहुंची
एयरपोर्ट की मौजूदा स्थिति लगभग तैयार
• रनवे और टर्मिनल: एयरपोर्ट का रनवे पूरी तरह तैयार है और इसे कमर्शियल विमानों के वजन सहने के लिए सुदृढ़ किया जा चुका है. यात्री टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण कार्य भी 95 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है.
• सुरक्षा और फायर फाइटिंग: अग्निशमन केंद्र और एटीसी टावर बनकर तैयार हैं. हाल ही में एएआई की टीम ने सुरक्षा मानकों का निरीक्षण भी किया है.
• फ्लाइट रूट: उड़ान योजना के तहत बोकारो को पटना और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों से जोड़ने की योजना है. एलायंस एयर जैसे ऑपरेटरों ने यहां से सेवाएं शुरू करने में रुचि दिखाई है.
देरी की वजह क्या रही
विमानन सेवाओं में देरी का मुख्य कारण सुरक्षा ऑडिट और लाइसेंसिंग प्रक्रिया थी. एयरपोर्ट के आसपास कुछ ऊंची संरचनाएं और पेड़ों के कारण ऑब्स्टेकल लिमिटेशन सरफेस सर्वे में आपत्तियां आई थीं. जिला प्रशासन ने अब इनमें से अधिकांश बाधाओं को दूर कर लिया है, जिससे 12 मई की बैठक के बाद रास्ता पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है.
विकास को मिलेगी नई रफ्तार
बोकारो एयरपोर्ट के शुरू होने से न केवल आम यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि बोकारो स्टील प्लांट और शैक्षणिक क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलेगा. उद्योगपतियों और छात्रों के लिए दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों तक पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे निवेश के नए अवसर खुलेंगे.
