चुप्पी तोड़ें, आवाज उठाएं: जानिए यौन उत्पीड़न के खिलाफ कैसे लड़ें

News Wave Desk: भारत में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. कार्यस्थलों पर महिलाओं के...

 News Wave Desk: भारत में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ यौन शोषण की घटनाएं आम होती जा रही हैं. सिर्फ घर और स्कूल में हिंसा का शिकार नहीं होती हैं, बल्कि कार्यस्थल पर भी यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. रिपोर्ट बताती है कि देश में लगभग 50% महिलाओं को अपने करियर के दौरान कभी न कभी यौन शोषण का सामना करना पड़ा है. हमारे समाज में शायद ही कोई महिला हो, जो यौन उत्पीड़न की समस्या से अनजान हो. कई महिलाएं रोजाना इस दर्द से गुजरती हैं, लेकिन जितने मामले दर्ज होते हैं, उससे कहीं अधिक मामले छुपा दिए जाते हैं. इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे समाज में बदनामी का डर, न्याय पाने में वर्षों लग जाना, या आरोपी की धमकी. इन कारणों से पीड़ित महिलाएं चुप रहना ही बेहतर समझती हैं, जो यौन उत्पीड़न की घटनाओं को और बढ़ावा देता है

यौन उत्पीड़न क्या है?

यौन उत्पीड़न वह किसी भी प्रकार की अवांछित यौन गतिविधि है, जो बिना सहमति के की जाती है. इसमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हो सकते हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में महिलाएं ही शिकार होती हैं. कई बार लड़कियों को यह भी नहीं पता चलता कि उनके साथ यौन उत्पीड़न हुआ था.

यौन उत्पीड़न के स्वरूप:

  • बिना अनुमति के अनुचित तरीके से छूना
  • अश्लील संदेश भेजना
  • जबरदस्ती किस करना
  • आपत्तिजनक टिप्पणियां करना
  • सीटी बजाना या अभद्र मजाक करना
  • किसी की निजी यौन जानकारी जानने की कोशिश

कानूनी प्रावधान

2013 से पहले, भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत ही यौन उत्पीड़न के मामले दर्ज होते थे, जिसमें दोषी पाए जाने पर 1 से 5 साल तक की सजा हो सकती थी. लेकिन 2013 के बाद कानून में बदलाव कर यौन उत्पीड़न से जुड़े अपराधों को चार अलग-अलग धाराओं में बांटा गया धारा 354A, 354B, 354C और 354D, जिनमें अलग-अलग अपराधों और सजा का प्रावधान है.

 

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