Hazaribagh: झारखंड में खेलों को बढ़ावा देने के सरकारी दावे धरातल पर दम तोड़ती आ रही है. राज्य के विभिन्न प्रखंडों में करोड़ों की लागत से बने स्टेडियम आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं. बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाएं पत्थरों और कंकड़ों के बीच पसीना बहाने को मजबूर हैं. सरकारी फाइलों में खेल विकास की योजनाएं तो चमक रही हैं, लेकिन हकीकत में मैदानों पर झाड़ियाँ और गड्ढे उग आए हैं.
बरकट्ठा: 84 लाख का स्टेडियम बना खंडहर
बरकट्ठा के डीह अडवार में स्थित मिनी स्टेडियम सरकारी उपेक्षा का सबसे बड़ा उदाहरण है. वर्ष 2016 में लगभग 84 लाख रुपये की लागत से इसका निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को मंच मिले लेकिन आज हकीकत इसके उलट है. निर्माण के कुछ समय बाद ही स्टेडियम का प्रवेश द्वार और चेंजिंग रूम टूट गया. वर्तमान में यह स्टेडियम खिलाड़ियों के बजाय पशुओं का चारागाह बन गया है.

मुखिया की मांग
बरकट्ठा दक्षिणी के मुखिया अब्बास अंसारी ने खेल मंत्री से स्टेडियम के जीर्णोद्धार, समतलीकरण, घास लगवाने और पेयजल की व्यवस्था करने की गुहार लगाई है. उन्होंने कहा कि रखरखाव के अभाव में सरकार का लाखों रुपया बर्बाद हो रहा है.
बड़कागांव और केरेडारी का बुरा हाल
बड़कागांव में स्थिति और भी चिंताजनक है. यहाँ सरकारी उपेक्षा के कारण दर्जनों खेल मैदान जर्जर हो चुके हैं. जलभराव और संसाधनों की कमी से खिलाड़ियों का मनोबल टूट रहा है. केरेडारी के ‘कृषि फार्म मैदान’ की स्थिति भी दयनीय है. यहाँ वर्षों से प्रतियोगिताएं होती रही हैं, लेकिन अब यह मैदान बंजर हो चुका है. कोयला क्षेत्र होने के कारण यहाँ बेतरतीब तरीके से हाईवा वाहन खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे खिलाड़ियों के लिए जगह ही नहीं बचती.
पद्मा और विष्णुगढ़: सुविधाओं का अकाल
पद्मा प्रखंड में खिलाड़ियों के लिए एक भी व्यवस्थित मैदान उपलब्ध नहीं है. यहां के खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए जेपीटीसी या साईं सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है. वहीं विष्णुगढ़ में स्थानीय युवाओं के लिए एकमात्र सहारा प्लस टू हाई स्कूल का मैदान है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रखंड मुख्यालय में एक सर्वसुविधायुक्त स्टेडियम होना अनिवार्य है ताकि गांव की प्रतिभा निखर सके..
बदहाली के बीच चमकते सितारे
इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, झारखंड के ये खिलाड़ी हार मानने को तैयार नहीं हैं. बड़कागांव से झालो कुमारी (फुटबॉल), सदानंद कुमार (एथलेटिक्स), सुरेंद्र कुमार तुरी (कराटे), और छोटू ठाकुर (दिव्यांग क्रिकेट) जैसे खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. खिलाड़ियों का साफ कहना है अगर हमें सिर्फ एक समतल मैदान और बेसिक सुविधाएं मिल जाएं, तो हम पदकों की झड़ी लगा सकते हैं.”
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