Newswave Desk: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका दिया है. 15 साल से सत्ता में रही अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस को इस बार हार का सामना करना पड़ा है. वहीं, BJP ने 207 सीटों पर जीत हासिल की है. चुनाव हारने के बाद अब ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आखिर मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उन्हें किस तरह की सुरक्षा मिलेगी, आइए जानते हैं.
मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी ममता बनर्जी की सुरक्षा पूरी तरह खत्म नहीं होगी. उन्हें पहले की तरह Z+ कैटेगरी की सुरक्षा मिलती रहेगी. आधिकारिक येलो बुक प्रोटोकॉल के तहत उनकी सुरक्षा के लिए अलग-अलग शिफ्ट में करीब 248 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं.

हालांकि, मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उन्हें जो अतिरिक्त सुविधाएं मिलती थीं, उनमें अब कटौती की जाएगी. उनके सरकारी कार्यक्रमों, आवास और कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल, बैरिकेडिंग, सुरक्षा बूथ, स्कैनर और ट्रैफिक कंट्रोल जैसी व्यवस्थाएं रहती थीं. सरकार बदलने के बाद इन अतिरिक्त इंतजामों को हटाया जा रहा है.
ममता बनर्जी कई अन्य मुख्यमंत्रियों की तरह सरकारी आवास में नहीं रहती हैं. वह Kolkata के कालीघाट स्थित अपने निजी घर में ही रहती हैं. मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उनके घर के आसपास मौजूद भारी सुरक्षा घेरा भी कम किया जाएगा. पहले यहां अक्सर बैरिकेडिंग, पुलिस तैनाती और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम देखने को मिलते थे.
पूर्व मुख्यमंत्री को सुरक्षा क्यों मिलती है?
भारत में नेताओं को मिलने वाली सुरक्षा उनके पद के बजाय खतरे के आकलन के आधार पर तय की जाती है. अगर कोई नेता पद छोड़ने के बाद भी राजनीति में सक्रिय रहता है और उसे सुरक्षा खतरा माना जाता है, तो उसकी सुरक्षा जारी रखी जाती है.
चुनाव में हार के बावजूद ममता बनर्जी अभी भी पश्चिम बंगाल की सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिनी जाती हैं. उनकी राजनीतिक सक्रियता और सार्वजनिक जीवन में लगातार मौजूदगी को देखते हुए उनकी हाई-लेवल सुरक्षा जारी रखने का फैसला लिया गया है.
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