Hazaribagh: कोनार डैम परियोजना से विस्थापित हजारों परिवारों की वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने डीवीसी कोनार डैम सभागार में परियोजना अधिकारियों और विस्थापित ग्रामीणों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. बैठक में पुनर्वास, मुआवजा, जमीन के मालिकाना हक और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई.
विस्थापितों को अधिकार दिलाने की मांग
बैठक में सांसद ने कोनार परियोजना प्रमुख राणा रणजीत सिंह एवं डीवीसी अधिकारियों के समक्ष बोकारो और हजारीबाग जिले के बनासो, नावाटांड सहित अन्य विस्थापित गांवों की समस्याओं को मजबूती से रखा. उन्होंने कहा कि कोनार डैम निर्माण के लिए करीब 70 वर्ष पूर्व जिन ग्रामीणों की जमीन ली गई, वे आज भी अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने विस्थापित परिवारों को अब तक जमीन का मालिकाना हक नहीं मिलने पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश और विकास परियोजना के लिए अपनी जमीन और घर छोड़े, उन्हें दशकों बाद भी न्याय नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने डीवीसी अधिकारियों से विस्थापितों की समस्याओं का शीघ्र समाधान निकालने और उन्हें उनका अधिकार दिलाने की दिशा में ठोस पहल करने की मांग की.
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सड़क, अस्पताल और पेयजल जैसी सुविधाओं का मुद्दा उठा
बैठक में सड़क, स्कूल, अस्पताल, नाली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. विस्थापित ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि वर्षों बीत जाने के बाद भी वे विकास की मुख्यधारा से दूर हैं और सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं.
सांसद ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि विस्थापितों की समस्याओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर समाधान सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने कहा कि विस्थापितों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए.
इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि जितेंद्र यादव, दीपक महतो, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय संगठन महासचिव सह विस्थापित नेता महेंद्र प्रसाद महतो उर्फ माही पटेल, विस्थापित अध्यक्ष सुशील महतो, सचिव सुरेश राम, मुखिया कुंवर हांसदा, आजसू प्रखंड अध्यक्ष अजय मंडल, मांडू विधायक प्रतिनिधि महादेव देहाती, पूर्व मुखिया कैलाश महतो सहित बड़ी संख्या में विस्थापित ग्रामीण उपस्थित रहे. बैठक के बाद विस्थापितों में उम्मीद जगी है कि वर्षों से लंबित उनकी मांगों और समस्याओं के समाधान की दिशा में अब सकारात्मक पहल हो सकेगी.
