Hazaribagh : झारखंड में सरकार की धान खरीद व्यवस्था और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर इन दिनों टाटीझरिया के झारखंड एफ्पीओ धान अधिप्राप्ति केंद्र में साफ दिखाई दे रहा है, किसानों का आरोप है कि महीनों पहले सरकारी दर पर धान बेचने की उम्मीद में उन्होंने केंद्र पर अपना धान जमा कराया था, लेकिन पोर्टल और अंगूठा सत्यापन की प्रक्रिया में फंसकर अब तक उनका भुगतान नहीं हो सका, थक हारकर किसान अब भारी मन से अपना धान वापस ले जाने को मजबूर हैं, जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के कई किसानों ने जनवरी के पहले सप्ताह में ही अपना धान एफ्मीओ केंद्र में जमा कर दिया था। किसानों को उम्मीद थी कि सरकारी दर पर धान बिकने से उन्हें उचित भुगतान मिलेगा और घर-परिवार की जरूरतें पूरी हो सकेंगी.
जनवरी से मई बीता मगर नहीं हो सका अंगूठा सत्यापन

लेकिन जनवरी से मई बीत जाने के बाद भी अंगूठा सत्यापन और पोर्टल प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, अब किसानों को धान वापस ले जाने में दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. एक ओर केंद्र तक धान पहुंचाने और फिर वापस ले जाने में वाहन खर्च उठाना पड़ रहा है, वहीं मजदूरी का अतिरिक्त बोझ भी बढ़ गया है. शनिवार को गोधिया निवासी पिंटू प्रसाद ने 51 क्विंटल, बेरहो निवासी निरपत प्रसाद ने 50 क्विंटल, बौधा निवासी मनोज प्रसाद कुशवाहा ने 43 क्विंटल, बेरहो निवासी लखन प्रसाद ने 35 क्विंटल, महेंद्र इंदिवर ने 27 क्विंटल, गोधिया निवासी अनिल प्रसाद ने 23 क्विंटल तथा जमुना मिस्त्री ने 10 क्विंटल धान केंद्र से वापस उठा लिया.
साहूकारों के कर्ज में फंसे हैं किसान
किसानों ने बताया कि खेती के लिए उन्होंने साहूकारों से कर्ज लिया था, अब अगली फसल के लिए खाद-बीज खरीदने, बच्चों की पीस भरने और घर के खर्च चलाने की चिंता सताने लगी है. किसानों का आरोप है कि जब उन्होंने देरी का कारण पूछा तो केंद्र से कहा गया कि इस सत्र में अब खरीद संभव नहीं है और अगले वर्ष शुरुआत में अंगूठा लिया जाएगा.
निजी व्यापारियों को धान बेचने की मजबूरी
धान नहीं बिकने से किसान अब निजी व्यापारियों को कम कीमत पर धान बेचने को मजबूर हैं. किसानों ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद केंद्रों की अव्यवस्था और बिचौलियों के दबदबे के कारण वास्तविक अन्नदाता आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं. मामले को लेकर क्षेत्र के किसानों में भारी नाराजगी है और अब सबकी नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है.
