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100 करोड़ का जबरन वसूली रैकेटः CBI जांच में हुआ खुलासा, तीन IPS अधिकारियों के नाम आए सामने, झारखंड से भी जुड़ा है कनेक्शन

  Delhi/Ranchi : देश की राजधानी दिल्ली के सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख देने वाले एक बड़े मामले में, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो...

 

Delhi/Ranchi :  देश की राजधानी दिल्ली के सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख देने वाले एक बड़े मामले में, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली पुलिस के भीतर चल रहे एक चौंकाने वाले 100 करोड़ रुपये के जबरन वसूली नेटवर्क पर अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है. इस पूरे विवाद के केंद्र में द्वारका जिला एंटी-नारकोटिक्स सेल के पूर्व प्रभारी, इंस्पेक्टर सुभाष यादव हैं. सुभाष यादव की गिरफ्तारी के बाद एक ऐसे शातिर रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जो निर्दोष लोगों को डराने-धमकाने, झूठे मामलों में ड्रग्स प्लांट करने और ऊंचे स्तर पर इस पूरे खेल को दबाने का काम कर रहा था.

अधिकारियों की पूछताछ में कई आरोप आए सामने, झारखंड कनेक्शन

सीबीआई की गिरफ्त में आए इंस्पेक्टर सुभाष यादव की पूछताछ के दौरान जांच ने उस समय बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया. जब उन्होंने अरुणाचल प्रदेश-गोवा -मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश कैडर के तीन वरिष्ठ आईपीएस आईपीएस अधिकारियों के नामों का खुलासा किया. खबर है कि इनमें एक आईपीएस का झारखंड कनेक्शन भी है. उनके फैमिली से जुड़े लोग झारखंड पुलिस में उच्च पद पर अपनी सेवा दे चुके हैं. इंस्पेक्टर का आरोप है, कि इन वरिष्ठ अधिकारियों को नारकोटिक्स सेल की इस अवैध गतिविधि की या तो पूरी जानकारी थी या वे खुद इसमें शामिल थे.

जांच पर उठते सवाल

इन आरोपों की गंभीरता इस बात से और बढ़ जाती है कि जिन तीन आईपीएस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें से एक अधिकारी वर्तमान में खुद
सीबीआई में ही प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं,.यानी जिस एजेंसी को भ्रष्टाचार को बेनकाब करने का जिम्मा सौंपा गया है, उसका एक वरिष्ठ अधिकारी ही संदेह के घेरे में आ गया है.

कैसे शुरू हुआ जांच का सिलसिला

इस सिंडिकेट की जांच की शुरुआत उत्तम नगर इलाके की रहने वाली एक महिला की शिकायत से हुई थी. यह महिला राजस्थान के एक ऐसे समुदाय से ताल्लुक रखती है, जो स्थानीय स्तर पर ड्रग्स और शराब के कारोबार से जुड़ा माना जाता है. इंस्पेक्टर सुभाष यादव की टीम (जिसमें हेड कांस्टेबल अजय भी शामिल था) ने कानूनी कार्रवाई का नाटक करते हुए महिला के घर पर छापा मारा.
जांच एजेंसी का आरोप है कि टीम ने महिला को झूठे केस में फंसाने के लिए जानबूझकर उसके घर में भारी मात्रा में गांजा रख दिया. सबूत प्लांट करने के बाद, पुलिस अधिकारियों ने मामले को रफा-दफा करने और एफआईआर दर्ज न करने के बदले में 25 लाख रुपये की रिश्वत मांगी.

दफ्तर से बरामद हुए लाखों रुपये

महिला की शिकायत के बाद जब सीबीआई ने द्वारका नारकोटिक्स सेल के कार्यालय पर छापा मारा, तो भ्रष्टाचार का पैमाना देखकर अधिकारी भी दंग रह गए. सीबीआई ने इंस्पेक्टर सुभाष यादव के निजी कमरे और सरकारी आवास से सीधे 48.9 लाख रुपये की नकदी बरामद की. शुरुआत में यह मामला सिर्फ एक शिकायत और रिश्वतखोरी का लग रहा था, लेकिन सीबीआई का मानना है कि इसके पीछे एक सुनियोजित और फैला हुआ सिंडिकेट काम कर रहा था. सीबीआई की थयोरी के मुताबिक, यह नारकोटिक्स यूनिट एक उगाही मशीन की तरह काम कर रही थी. इनका काम ड्रग व्यापार से जुड़े ऐसे सॉफ्ट टारगेट्स (कमजोर कड़ियों) की पहचान करना था, जिनसे डरा-धमकाकर प्रोटेक्शन मनी और नेगोशिएटेड सेटलमेंट के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले जा सकें. जांचकर्ता अब संदिग्ध बेनामी संपत्तियों, आय से अधिक संपत्ति और भारी वित्तीय लेन-देन की स्क्रूटनी कर रहे हैं. जिससे संकेत मिलते हैं कि यह पूरा सिंडिकेट 100 करोड़ रुपये से अधिक का है.

 

 

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