बूंद-बूंद पेट्रोल-डीजल को तरस रहे लोग, हर दिन 200 करोड़ के कारोबार का नुकसान, उत्पादन में 40 फीसदी तक की गिरावट

  मॉल में जेनरेट के लिये नहीं मिल रहा डीजल, पसरा अंधेरा कृषि, यातायात, लॉजिस्टिक्स हर क्षेत्र प्रभावित हर दिन 40 से...

 

  • मॉल में जेनरेट के लिये नहीं मिल रहा डीजल, पसरा अंधेरा
  • कृषि, यातायात, लॉजिस्टिक्स हर क्षेत्र प्रभावित
  • हर दिन 40 से 45 लाख लीटर डीजल की खपत

 

Ajay Dayal 

Ranchi : झारखंड की रगों में दौड़ने वाला डीजल और पेट्रोल अब बूंद-बूंद को तरसा रहा है. तेल की इस भयंकर किल्लत ने पूरे सूबे की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. यह सिर्फ गाड़ियों के रुकने की कहानी नहीं है, बल्कि यह झारखंड की अर्थव्यवस्था के दम तोड़ने का खौफनाक मंजर है. खेतों में बोरिंग का काम ठप पड़ा है. अन्नदाता बेबस है. बड़े-बड़े मॉल में अंधेरा पसर रहा है क्योंकि जेनरेटरों का पेट भरने के लिए डीजल गायब है. सड़कों से ऑटो नदारद हैं और फैक्ट्रियों की चिमनियां बुझने के कगार पर हैं. यह संकट सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि सड़कों पर बिखरा दर्द है. जो ऑटो रिक्शा आम आदमी की सवारी थे, वे ईंधन के अभाव में कतारों में खड़े हैं. किसान खेतों में खड़ा होकर आसमान और सूखी बोरिंग को देख रहा है.

हर दिन 40 से 45 लाख लीटर है डीजल की खपत

झारखंड में हर दिन औसतन 40 लाख से 45 लाख लीटर डीजल की खपत होती है. वहीं, पेट्रोल की दैनिक खपत लगभग 20 लाख से 25 लाख लीटर के बीच बैठती है. पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन और व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान संकट के कारण इस कुल दैनिक आपूर्ति में 40 से 50 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है. हर दिन राज्य को उसकी जरूरत का आधा तेल भी नसीब नहीं हो पा रहा है. डीजल न मिलने से सबसे तगड़ी चोट कृषि और परिवहन क्षेत्र पर पड़ी है. जिसने पूरे व्यापार चक्र को ही जाम कर दिया है.

हर दिन लगभग 150 करोड़ से 200 करोड़ का कारोबार हो रहा प्रभावित

तेल की इस किल्लत ने झारखंड के व्यापार और वाणिज्य की कमर मरोड़ कर रख दी है. चैंबर ऑफ कॉमर्स के शुरुआती आंकलन के अनुसार, डीजल-पेट्रोल के इस अकाल के कारण राज्य में हर दिन लगभग 150 करोड़ से 200 करोड़ रुपये का कारोबार सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है. रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो की छोटी बड़ी फैक्ट्रियों को डीजल न मिलने से उत्पादन में 40 फीसदी तक की गिरावट आई है. जिससे दैनिक रूप से 60 से 70 करोड़ रुपये का नुकसान सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को हो रहा है.

ट्रांसपोटेशन सेक्टर में हर दिन 40 करोड़ की चपत

सड़कों पर मालवाहक ट्रकों और ऑटो के पहिए थमने से लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन को रोजाना 40 करोड़ रुपये की चपत लग रही है. वहीं, मॉल, सिनेमा हॉल और रिटेल बाजारों में जेनरेटर नहीं चल पा रहे हैं. जिससे रिटेल सेक्टर को हर दिन 30 करोड़ रुपये से अधिक की हानि उठानी पड़ रही है.

बोरिंग करने वालों का कारोबार भी ठप

राज्य में बोरिंग करने वालों का भी कारोबार ठप हो गया है. रवि वर्मा ने बताया कि बोरिंग करने में 800 लीटर डीजल की खपत होती है. डीजल नहीं मिलने के कारण ऑर्डर भी नहीं ले पा रहे हैं. रांची में डीजल नहीं मिलने के कारण गुमला के सिसई से डीजल लेने के लिए गाड़ी भेजें. वहां भी डीजल नहीं मिल पाया. कारोबार पर विपरित असर पड़ रहा हैं. यही स्थिति रहा तो बोरिंग का कारोबार एक सप्ताह के अंदर ठप हो जाएगा.

 

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