प्रदेश कांग्रेस में जंबो बगावत: के. राजू के एक फोन ने टाला हल्लाबोल, क्या सुलगती चिंगारी को बुझा पाएगा डैमेज कंट्रोल?

Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस में नई जंबो जेट कमेटी के गठन के साथ ही शुरू हुआ अंदरूनी घमासान अब चरम पर पहुंच...

Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस में नई जंबो जेट कमेटी के गठन के साथ ही शुरू हुआ अंदरूनी घमासान अब चरम पर पहुंच गया है. पार्टी के भीतर असंतोष की चिंगारी इस कदर भड़क चुकी है कि नाराज नेताओं ने सीधे प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया. हालांकि, ऐन वक्त पर केंद्रीय हस्तक्षेप और दिल्ली से आए एक फोन कॉल ने फिलहाल प्रदेश कांग्रेस को एक बड़े सार्वजनिक मंच पर शर्मसार होने से बचा लिया है. प्रदेश प्रभारी के. राजू के आश्वासन के बाद नाराज गुट ने नेतृत्व के खिलाफ होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस को स्थगित तो कर दिया है, लेकिन अंदरूनी कलह पूरी तरह शांत होना अभी बाकी है.

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प्रशांत किशोर, सुरेंद्र सिंह और जगदीश साहू के इस्तीफे से हड़कंप

कांग्रेस की नवगठित कमेटी के सामने आते ही पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष खुलकर सतह पर आ गया. वर्तमान कमेटी से नाराज चल रहे सूबे के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के पुत्र प्रशांत किशोर, पूर्व प्रदेश महासचिव सुरेंद्र सिंह और वरिष्ठ नेता सह प्रदेश प्रवक्ता जगदीश साहू ने न सिर्फ अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप मढ़े. पार्टी के बुजुर्ग नेता और प्रवक्ता जगदीश साहू के नेतृत्व में नाराज कांग्रेसियों ने रांची प्रेस क्लब में एक हल्ला बोल संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया था. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का मकसद वर्तमान प्रदेश नेतृत्व की रणनीतियों और फैसलों को सार्वजनिक रूप से कटघरे में खड़ा करना था, जिससे पार्टी की अंदरूनी खींचतान चौराहे पर आ जाती.

प्रभारी के एक फोन से टला संकट

इस बड़े सियासी ड्रामे और सार्वजनिक किरकिरी से बचने के लिए कांग्रेस आलाकमान को तुरंत रेस्क्यू मोड में आना पड़ा. बागी नेता जगदीश साहू ने खुद खुलासा किया कि जैसे ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश मामलों के प्रभारी के. राजू को इस हल्लाबोल प्रेस कॉन्फ्रेंस की भनक लगी, उन्होंने तुरंत फोन लाइन मिलाई. जगदीश साहू ने कहा कि प्रदेश प्रभारी के. राजू ने खुद फोन कर आज की संवाददाता सम्मेलन को स्थगित करने का व्यक्तिगत आग्रह किया. उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वे बहुत जल्द रांची का दौरा करेंगे और सभी नाराज नेताओं के साथ वन-टू-वन बैठकर उनकी शिकायतों को सुनेंगे और जायज मांगों को पूरा करेंगे.

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क्या वाकई थम जाएगा तूफान?

राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह स्थगन केवल एक अस्थाई युद्धविराम है, स्थाई शांति नहीं. झारखंड में सांगठनिक मजबूती के दावों के बीच अपनों की यह बगावत यह दर्शाती है कि नई जंबो कमेटी में क्षेत्रीय और व्यक्तिगत संतुलन साधने में प्रदेश नेतृत्व कहीं न कहीं चूक गया है. अब पूरी कमान केंद्रीय प्रभारी के. राजू के हाथों में है. देखना दिलचस्प होगा कि जब वह रांची आकर नाराज नेताओं के साथ टेबल पर बैठेंगे, तो असंतोष के इस डैमेज को कंट्रोल करने के लिए उनके पास क्या फॉर्मूला होता है.

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