Chakradharpur: पश्चिम सिंहभूम जिले का एकमात्र मुख्य चिकित्सा केंद्र सदर अस्पताल, चाईबासा इन दिनों खुद ही वेंटिलेटर पर है. अस्पताल में बड़े-बड़े भवन तो बना दिए गए हैं, लेकिन वे केवल हाथी के दांत साबित हो रहे हैं. अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की घोर कमी है और बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं. यह तीखा आरोप भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष पवन शंकर पांडे ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगाया है.
मरीजों का इलाज भगवान भरोसे
शंकर पांडे ने एक बयान जारी कर कहा, कि चाईबासा सदर अस्पताल की स्थिति आज इतनी दयनीय हो चुकी है, कि यहां मरीजों का इलाज भगवान भरोसे चल रहा है. उन्होंने अस्पताल की बदहाली को लेकर कहा, कि इस भीषण गर्मी में अस्पताल में जेनरेटर की कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं है. बिजली कटते ही पंखे बंद हो जाते हैं और मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है. हद तो तब हो जाती है जब डॉक्टरों को टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन करने पर मजबूर होना पड़ता है. अस्पताल के ब्लड बैंक को राज्य सरकार द्वारा पिछले 8 महीनों से लाइसेंस नहीं दिया गया है, जिससे यहां रक्त की उपलब्धता ठप है. गरीब मरीजों को खून के लिए टाटा (जमशेदपुर) के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है.

उन्होंने कहा कि अस्पताल में सीटी स्कैन और एमआरआई (MRI) जैसी अत्यंत आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. गरीब आदिवासी और आम नागरिक, जिनके पास निजी अस्पतालों में जाने के संसाधन नहीं हैं, वे बाहर महंगी जांच कराने को मजबूर हैं. किसी भी प्रखंड या अनुमंडल से जब मरीज को सदर अस्पताल रेफर किया जाता है, तो यहां के डॉक्टर जिम्मेदारी उठाने के बजाय उसे सीधे एमजीएम (जमशेदपुर) रेफर कर देते हैं.
स्वास्थ्य विभाग का यह रवैया जनता के साथ सरासर अन्याय
भाजपा नेता पवन शंकर पांडे ने स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, कि हर जिले के अस्पतालों को ‘हाईटेक’ बनाने की उनकी बड़ी-बड़ी बातें चाईबासा में पूरी तरह नकारा और खोखली साबित हुई हैं. चाईबासा जैसे अति पिछड़े और आदिवासी बहुल जिले के प्रति स्वास्थ्य विभाग का यह रवैया यहां की जनता के साथ सरासर अन्याय है. उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से पुरजोर मांग की है, कि चाईबासा की जनता की भावनाओं और तकलीफों को गंभीरता से लिया जाए. सदर अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को तुरंत दूर किया जाए, ब्लड बैंक का लाइसेंस अविलंब बहाल हो और अस्पताल की बिजली व जांच व्यवस्था को सुधारा जाए, ताकि गरीब जनता को इलाज के लिए भटकना न पड़े.
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