Report: Amit Verma

Lohardaga: जिले के सेनहा प्रखंड अंतर्गत जामुन डिपा टाना टोली झालजमुरा में जिला राजी पड़हा व्यवस्था लोहरदगा की ओर से तीन दिवसीय विशु सेंदरा कार्यक्रम का आयोजन पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ किया जा रहा है. 18, 19 और 20 मई तक चलने वाले इस आयोजन का उद्देश्य आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक प्रतिनिधि, पारंपरिक पदाधिकारी और युवा शामिल हो रहे हैं.
पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पूजा-अर्चना और आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुरूप विधि-विधान के साथ हुई. आयोजन स्थल पर समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला. इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा, लोक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता की झलक भी देखने को मिली. बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने अपने समाज की संस्कृति और पहचान को जीवित रखने के संकल्प को दोहराया.
विशु सेंदरा को संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी- रोहित उरांव
इस अवसर पर युवा नेता एवं समाजसेवी रोहित उरांव विशेष रूप से उपस्थित रहे. उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, कि विशु सेंदरा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है. इसे संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, विशेषकर युवाओं को अपनी संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण के लिए आगे आना होगा.
इस दौरान उन्होंने जिला राजी पड़हा व्यवस्था द्वारा किए जा रहे इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा, कि ऐसे कार्यक्रम समाज को एक मंच पर लाने का कार्य करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाजों और सामाजिक मूल्यों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं. उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखना अत्यंत आवश्यक है.
समाज के विभिन्न विषयों पर की जाएगी चर्चा
आयोजन समिति की ओर से जानकारी दी गई, कि तीन दिवसीय इस कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक पूजा-पाठ, सेंदरा से जुड़े नियमों की जानकारी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामाजिक विचार-विमर्श तथा समाज के विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी. समिति के सदस्यों ने बताया कि इस तरह के आयोजन समाज में एकता और सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं.
बता दें, विशु सेंदरा कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह का माहौल है. समाज के लोगों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन न केवल सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने में सहायक होते हैं, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और परंपराओं के संरक्षण को भी मजबूती प्रदान करते हैं. तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.
आयोजन में ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला राजी पड़हा व्यवस्था के कई पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. आयोजन में मुख्य रूप से लक्ष्मी नारायण भगत बेल (राजा), विरेंद्र उरांव देवान, डोमना उरांव कोटवार, गोसाई भगत भंडारी, बुद्धेश्वर उरांव उप बेल, बजरंग उरांव उप देवान, सुखदेव उरांव उप कोटवार, नारायण उरांव उप भंडारी, मंजन उरांव जोक बेल, सुरेंद्र उरांव तथा मीडिया प्रभारी जगदीप भगत और राजू बखला जोंक देवान उपस्थित रहे.
इसके अलावा, कार्यक्रम में विधायक प्रतिनिधि निशीथ जायसवाल, संजय कुमार, पड़हा व्यवस्था के पदाधिकारी, विभिन्न गांवों के पहान, पुजार, महतो, प्रधान सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण भी मौजूद रहे. पूरे आयोजन के दौरान पारंपरिक संस्कृति के प्रति लोगों का उत्साह और जुड़ाव देखने को मिला.
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