‘वोट नहीं, लोकतंत्र निशाने पर’- सुप्रियो भट्टाचार्य का भाजपा और चुनाव प्रक्रिया पर हमला

Ranchi: झारखंड की सियासत में चुनावी पारदर्शिता को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. सुप्रियो भट्टाचार्य ने भाजपा और चुनाव प्रक्रिया...

Ranchi: झारखंड की सियासत में चुनावी पारदर्शिता को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. सुप्रियो भट्टाचार्य ने भाजपा और चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अब राजनीति केवल दल-बदल या सत्ता प्रबंधन तक सीमित नहीं रही, बल्कि मतदाताओं की पहचान और अस्तित्व पर भी खतरा पैदा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि देश ने “सरकार की चोरी” और “सत्ता की डकैती” का दौर देखा है, लेकिन अब “वोटर चोरी” की शुरुआत हो चुकी है. उनका दावा किया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया गया और अदालतों की टिप्पणियां भी कई सवाल खड़े करती हैं.

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भाजपा विरोधी मतदाताओं को निशाना बनाकर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की तैयारी

सुप्रियो भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग के नारे “No Voter Left Behind” का जिक्र करते हुए कहा कि जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है. उनके मुताबिक, बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और अब झारखंड में भी SIR प्रक्रिया के जरिए वैसी ही स्थिति बनाने की कोशिश हो रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विरोधी मतदाताओं को निशाना बनाकर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की तैयारी की जा रही है. उन्होंने कहा कि पहले राजनीतिक दल लोगों को प्रलोभन देकर अपने पक्ष में करने की कोशिश करते थे, लेकिन अब सीधे मतदाता सूची को प्रभावित करने की रणनीति अपनाई जा रही है. इस दौरान उन्होंने BLO और माइक्रो ऑब्जर्वर से निष्पक्षता बनाए रखने और किसी भी दबाव में न आने की अपील की.

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परिसीमन को लेकर जताई गई चिंता

परिसीमन को लेकर भी सुप्रियो ने चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि असम मॉडल की तर्ज पर झारखंड में भी विधानसभा क्षेत्रों की संरचना बदलने की कोशिश हो सकती है, ताकि राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया जा सके. उन्होंने कहा कि झारखंड कोई सामान्य राज्य नहीं, बल्कि लंबे जनसंघर्ष और आंदोलन की उपज है. यहां की सामाजिक संरचना, राजनीतिक चेतना और जनता का मिजाज अलग है. इसलिए चुनाव आयोग को यहां काम करते समय अतिरिक्त संवेदनशीलता और निष्पक्षता बरतनी चाहिए.

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