Ranchi: राजधानी रांची समेत पूरा झारखंड इस वक्त सूरज की भीषण तपिश से झुलस रहा है, लेकिन झारखंड राज्य बिजली वितरण ने जनता को इस आग में अकेला छोड़ दिया है. दावों और वादों की बिजली तो 24 घंटे कड़क रही है, लेकिन हकीकत के धरातल पर ट्रांसफार्मर लोड तक नहीं ले पा रहे हैं. भीषण गर्मी में लोड बढ़ते ही कभी फ्यूज उड़ रहा है, तो कभी लोकल फॉल्ट के नाम पर घंटों ब्लैकआउट हो रहा है. वीआईपी अफसरों के वातानुकूलित कमरों से सिर्फ निर्बाध बिजली के खोखले निर्देश जारी हो रहे हैं, जो केवल लाइमलाइट बटोरने का जरिया हैं. जमीनी हकीकत यह है कि राजधानी रांची में बिजली की डिमांड सामान्य से 70 से 75 मेगावाट अधिक हो गई है.

सालाना 400 करोड़ का मेंटेनेंस, फिर भी उड़ रहे फ्यूज
विभागीय आंकड़ों और दावों की मानें, तो सालों भर चलने वाले रिपेयर और मेंटेनेंस पर 300 से 400 करोड़ रुपये फूंक दिए जाते हैं.इसके बावजूद फ्यूज उड़ रहा है. बिजली संकट को दूर करने के लिए रांची में अंडरग्राउंड केबलिंग का ढिंढोरा पीटा गया था। काम आज तक पूरा नहीं हो पाया है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है. खुले तार और जर्जर बुनियादी ढांचा आज भी जस का तस है.
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सिर्फ कागजों पर कमांड’, जमीन पर हाहाकार
बिजली विभाग के आला अधिकारी हर दिन मैराथन बैठकें करते हैं, मातहतों को नो ट्रिपिंग का कड़ा निर्देश देते हैं और अपनी पीठ थपथपाकर लाइमलाइट में बने रहते हैं. लेकिन इन कागजी निर्देशों से न तो फ्यूज बंध रहे हैं और न ही जलते ट्रांसफार्मर ठंडे हो रहे हैं.
