Ranchi: सोशल मीडिया और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारतीय सेना की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो तेजी से प्रसारित किया जा रहा है. भारतीय सेना ने इस भ्रामक प्रचार का कड़ा संज्ञान लेते हुए पूरी स्थिति को स्पष्ट किया है और आम जनता से ऐसी अफवाहों से बचने की अपील की है.

अनुशासनहीनता के कारण नौकरी से निकाले गए हैं आरोपी
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे लोग किसी न्याय या सत्य की लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि वे अनुशासनहीनता के दोषी हैं. वीडियो में नजर आ रहे तीन पूर्व सैनिकों चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव और पी नरेंद्र को उनके गैर-सैनिक व्यवहार और गंभीर अनुशासनहीनता के आधार पर पहले ही सेना की नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है. इसके अतिरिक्त, इस समूह में शामिल चौथा व्यक्ति शंकर सिंह गुज्जर वर्तमान में एक भगोड़ा है. उसके खिलाफ सैन्य और नागरिक अदालत दोनों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है.
ध्यान भटकाने के लिए फैलाया जा रहा है प्रोपेगैंडा
जांच में यह बात सामने आई है कि ये लोग जानबूझकर सोशल मीडिया और अन्य मंचों का सहारा लेकर झूठी, दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक बातें फैला रहे हैं. इस सुनियोजित प्रोपेगैंडा का मुख्य उद्देश्य अपनी खुद की गंभीर गलतियों, कोर्ट-मार्शल और नौकरी से निकाले जाने की सच्चाई से लोगों का ध्यान भटकाना है. यह भारतीय सेना जैसी सम्मानित संस्था को बदनाम करने का एक सोचा-समझा प्रयास है.
सेना पहले भी दे चुकी है चेतावनी
यह पहली बार नहीं है जब इन तत्वों द्वारा इस तरह की हरकत की गई है. इससे पहले 17 सितंबर 2024 को भी भारतीय सेना ने चंदू चव्हाण और हरेंद्र यादव द्वारा फैलाए जा रहे फर्जी और दुर्भावनापूर्ण संदेशों और वीडियो के खिलाफ आधिकारिक तौर पर स्पष्टीकरण जारी किया था और सच्चाई देश के सामने रखी थी.
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भ्रामक जानकारियों से सावधान रहने की अपील
भारतीय सेना ने कहा है कि आम नागरिकों और मीडिया जगत को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे किसी भी देशविरोधी और सेना विरोधी प्रोपेगैंडा का शिकार न हों. किसी भी वीडियो या सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य कर लें और इस प्रकार की गलत जानकारियों से पूरी तरह सावधान रहें.
