Ranchi: झारखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही सर्पदंश (सांप के काटने) की घटनाओं में भारी उछाल आता है. ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में यह समस्या एक गंभीर स्वास्थ्य आपदा का रूप ले चुकी है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, झारखंड में होने वाली कुल मौतों में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी अकेले रस्सेल वाइपर सांप की है. यह सांप बेहद गुस्सैल होता है और इसका हीमोटॉक्सिक जहर इंसानी शरीर के अंगों को तेजी से फेल कर देता है.

इसके अलावा रात के अंधेरे में बिस्तर पर काटने वाला कॉमन करैत दूसरा सबसे बड़ा हत्यारा साबित होता है, क्योंकि इसके काटने पर शुरुआती दर्द नहीं होता और मरीज नींद में ही दम तोड़ देता है. राज्य गठन से लेकर अब तक सर्पदंश के 90 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं.
पलामू प्रमंडल में सबसे अधिक मौतें
अगर जिलावार आंकड़ों और संवेदनशीलता की बात करें, तो झारखंड का पलामू प्रमंडल (विशेषकर पलामू और गढ़वा जिला) सर्पदंश से होने वाली मौतों के मामले में सबसे आगे और संवेदनशील माना जाता है. पलामू के मेदिनीनगर, चैनपुर, उंटारी रोड और गढ़वा सदर अस्पताल में हर साल मानसून के समय सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं.
पलामू के बाद आदिवासी बहुल पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा), लोहरदगा, गुमला और गिरिडीह जिलों में भी सर्पदंश के मामलों की संख्या सर्वाधिक दर्ज की जाती है. इन जिलों के दूर-दराज गांवों में रात को जमीन पर सोने की परंपरा और झाड़-फूंक पर निर्भरता मौतों की संख्या को बढ़ा देती है.
अत्यधिक जहरीले सांप
• कॉमन करैत: इसे झारखंड का सबसे खतरनाक साइलेंट किलर कहा जाता है. यह रात में सक्रिय होता है और सोते हुए लोगों को काटता है. इसका जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है.
• गेहुंवन या नाग: यह सबसे जहरीला सांप है जो खेतों और रिहायशी इलाकों के आसपास पाया जाता है. खतरा महसूस होने पर यह फन फैलाता है.
• रस्सेल वाइपर: यह सांप भूरे रंग का और काफी गठीला होता है. इसके काटने पर भयंकर दर्द होता है और शरीर के अंदर ब्लीडिंग शुरू हो जाती है क्योंकि इसका जहर हीमोटॉक्सिक होता है.
• बैंडेड करैत: इस सांप पर काले और पीले रंग की चौड़ी धारियां होती हैं. यह बहुत जहरीला होता है, लेकिन स्वभाव से शर्मीला होने के कारण इंसानों को बहुत कम काटता है. यह अक्सर दूसरे छोटे सांपों को अपना भोजन बनाता है.
• बंबू पिट वाइपर: यह हरे रंग का सांप होता है जो मुख्य रूप से दलमा अभ्यारण्य, सारंडा और लातेहार के बांस के जंगलों या पेड़ों पर पाया जाता है.
कम या मध्यम जहरीले सांप
• कॉमन कैट स्नेक: इसकी आंखें बिल्ली जैसी दिखती हैं. यह कम जहरीला होता है.
• ग्रीन वाइन स्नेक: यह बिल्कुल पतला और हरे रंग का होता है, जो झाड़ियों में छिपा रहता है.
बिना जहर वाले सांप
• धामन या घोड़ा पछाड़: यह बहुत लंबा और फुर्तीला सांप होता है. अक्सर लोग इसे कोबरा समझकर मार देते हैं, जबकि इसमें जहर नहीं के बराबर होता है.
• अजगर: यह झारखंड के जंगलों में पाया जाने वाला सबसे भारी और बड़ा सांप है, जो अपने शिकार को जकड़कर निगल जाता है.
• चेकर्ड कीलबैक (डोडिया या पानी सांप): यह कुओं, तालाबों और धान के खेतों में पाया जाने वाला आम पानी का सांप है.
• भेड़िया सांप: यह हुबहू करैत जैसा दिखता है, जिसके कारण लोग डर जाते हैं, लेकिन यह पूरी तरह बेअसर होता है.
• दोमुंहा सांप: यह रेतीली और दोमट मिट्टी के आसपास पाया जाता है.
अस्पतालों में क्या हैं इंतजाम
सर्पदंश का एकमात्र इलाज एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन है. राहत की बात यह है कि झारखंड सरकार ने सर्पदंश को राज्य विशिष्ट आपदा घोषित किया है, जिसके तहत पीड़ित परिवार को मृत्यु की स्थिति में 4 लाख तक के मुआवजे का प्रावधान है.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्तमान में राज्य के सभी जिला सदर अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी वेनम की खुराक पर्याप्त मात्रा में निःशुल्क उपलब्ध कराई गई है.
उपचार प्रोटोकॉल
गंभीर मरीजों को डॉक्टरों की देखरेख में एंटी वेनम की 10 वाइल तक दी जाती हैं. डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को इसके त्वरित प्रबंधन के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है. हालांकि, सुदूर ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक उप-केंद्रों में रेफ्रिजरेशन (कोल्ड चेन रखरखाव) की कमी के कारण कभी-कभी स्थानीय स्तर पर इसकी उपलब्धता प्रभावित होती है.
स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन और बचाव के निर्देश
• झाड़-फूंक से बचें: सांप काटने के बाद ओझा-गुनी या झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद बिल्कुल न करें. मरीज को सीधे नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं, क्योंकि जहर फैलने के शुरुआती 1-2 घंटे (गोल्डन ऑवर) बेहद महत्वपूर्ण होते हैं.
• जमीन पर सोने से परहेज: ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सलाह दी गई है कि वे बरसात के दिनों में जमीन पर सोने के बजाय चौकी या पलंग का इस्तेमाल करें और अनिवार्य रूप से मच्छरदानी लगाकर सोएं. मच्छरदानी करैत जैसे सांपों से सुरक्षा कवच का काम करती है.
• घाव के साथ छेड़छाड़ न करें: सांप काटने वाली जगह को चीरा न लगाएं, मुंह से चूसकर जहर निकालने की कोशिश न करें और न ही उस पर बर्फ रगड़ें.
• अंधेरे में टॉर्च का प्रयोग: रात में घरों से बाहर निकलते समय या खेतों में जाते समय हमेशा टॉर्च और लाठी का प्रयोग करें.
