करोड़ों की मशीनें बेअसर, अंधेरे में कराहते मरीज: शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज हजारीबाग की बिजली व्यवस्था पर उठे सवाल

Hazaribagh: उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े...

Hazaribagh: उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से लगाए गए जनरेटर और सोलर बैकअप सिस्टम होने के बावजूद बिजली कटते ही वार्डों में अंधेरा छा जा रहा है. भीषण गर्मी और उमस के बीच मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार अस्पताल परिसर में 263 KVA, 163 KVA और 63 KVA क्षमता के तीन बड़े जनरेटर मौजूद हैं. इसके अलावा सौर ऊर्जा के लिए दो बड़े सोलर सेटअप भी लगाए गए हैं. दावा किया जाता है कि अस्पताल की बिजली व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए हर वर्ष करीब पांच करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जाता है. लेकिन हकीकत यह है कि जैसे ही बिजली आपूर्ति बाधित होती है, बैकअप सिस्टम समय पर काम नहीं करता और पूरा अस्पताल अंधेरे में डूब जाता है.

गर्मी में बेहाल मरीज, टॉर्च और हाथ के पंखों का सहारा

बिजली कटने के दौरान अस्पताल के कई वार्डों में मरीजों को मोबाइल की टॉर्च और हाथ के पंखों के सहारे रात गुजारनी पड़ रही है. सबसे अधिक परेशानी गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और नवजात शिशुओं को हो रही है. परिजनों का आरोप है कि बिजली जाते ही जनरेटर चालू होने में लंबा समय लग जाता है या कई बार बैकअप पूरी तरह फेल हो जाता है. अस्पताल परिसर से सामने आए वीडियो और तस्वीरों में मरीजों के बीच अफरा-तफरी और उमस से बेहाल लोगों की स्थिति साफ देखी जा सकती है.

स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक बनाने का दावा कर रही है, लेकिन हजारीबाग के सबसे बड़े अस्पताल की स्थिति, उन दावों की पोल खोल रही है. लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी मरीजों को मूलभूत सुविधा नहीं मिल पा रही है, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है.

सांसद मनीष जायसवाल ने जताई नाराजगी

मामले की जानकारी मिलने के बाद हजारीबाग सांसद ने अस्पताल प्रबंधन पर नाराजगी जताई है. सांसद के निर्देश पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल प्रबंधन से तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो जनता का आक्रोश बढ़ सकता है.

रखरखाव पर भी उठने लगे सवाल

स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल में लगे जनरेटर और बैकअप सिस्टम के रखरखाव पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि रखरखाव के नाम पर हर वर्ष भारी राशि खर्च की जाती है, लेकिन जरूरत के समय मशीनें काम नहीं करतीं. ऐसे में पूरे सिस्टम की तकनीकी जांच और जवाबदेही तय किए जाने की मांग तेज हो गई है. अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी है कि आखिर मरीजों को इस संकट से राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.

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