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डिजिटल सेवाओं के सारथियों का फूटा आक्रोश, हजारीबाग जिले में प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने शुरू किया आंदोलन

Hazaribagh: झारखंड प्रदेश डिजिटल पंचायत सचिवालय प्रज्ञा केंद्र संचालक संघ के आह्वान पर हजारीबाग जिले में प्रज्ञा केंद्र संचालकों का असंतोष अब...

Hazaribagh: झारखंड प्रदेश डिजिटल पंचायत सचिवालय प्रज्ञा केंद्र संचालक संघ के आह्वान पर हजारीबाग जिले में प्रज्ञा केंद्र संचालकों का असंतोष अब आंदोलन में बदलने लगा है. जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालक अपनी लंबित मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की राह पर हैं. इसी क्रम में जिलेभर के सभी पंचायतों के प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने मंगलवार से डिजिटल एवं कार्यालयीय अटेंडेंस का बहिष्कार शुरू कर दिया है. संचालकों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के बावजूद आम लोगों को मिलने वाली डिजिटल और सरकारी सेवाएं पूर्ववत जारी रहेंगी. जनहित को प्रभावित किए बिना अपनी मांगों को सरकार और संबंधित विभाग तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.

ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार और जनता के बीच निभा रहे सेतु की भूमिका

प्रज्ञा केंद्र संचालकों का कहना है कि वे वर्षों से ग्रामीण इलाकों में सरकार और आम जनता के बीच डिजिटल सेतु का कार्य कर रहे हैं. आय, जाति, आवासीय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, पेंशन, आधार सेवा, छात्रवृत्ति आवेदन समेत दर्जनों सरकारी सेवाएं गांव-गांव तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका है. इसके बावजूद उन्हें न तो सम्मानजनक मानदेय मिल रहा है और न ही कार्य के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. संचालकों का आरोप है कि उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन अधिकार और संसाधन नहीं दिए जा रहे.

सीएससी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग

आंदोलनरत संचालकों ने कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि कई महत्वपूर्ण निर्णय बिना परामर्श और पारदर्शिता के लागू किए जाते हैं, जिससे संचालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. संघ ने सीएससी की कथित मनमानी पर रोक लगाने, व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने तथा प्रज्ञा केंद्र संचालकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.

बार-बार मांग उठाने के बावजूद नहीं मिला समाधान

संघ के विष्णुगढ़ प्रखंड अध्यक्ष सुजीत कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि विभिन्न मांगों को लेकर कई बार सरकार और संबंधित विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. लगातार उपेक्षा और अनदेखी के कारण संचालकों में असंतोष बढ़ता गया, जिसके बाद आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी सेवा को बंद कराने के लिए नहीं, बल्कि उन हजारों प्रज्ञा केंद्र संचालकों के सम्मान, अधिकार और भविष्य की सुरक्षा के लिए है, जो डिजिटल इंडिया की अवधारणा को जमीनी स्तर पर साकार कर रहे हैं.

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