Ranchi : झारखंड के सियासी गलियारे में इन दिनों एक नया खेल चल रहा है. जिसे वेटिंग फॉर द सिग्नल्स कहा जा सकता है. झारखंड कांग्रेस ने राज्यसभा की एक सीट पर अपनी दावेदारी का झंडा तो बुलंद कर दिया है, लेकिन गठबंधन के सर्कल से नेटवर्क गायब है. झामुमो ने दो – तीन दिन में बात करने का भरोसा दिया था, मगर वह दो – तीन दिन कब के बीत गए. सस्पेंस गहरा गया है. कांग्रेसियों का ‘हार्टबीट’ यानी दिल की धड़कनें पूरी रफ्तार से बढ़ रही हैं.

झामुमो की खामोशी और कांग्रेस का सस्पेंस
झामुमो के रणनीतिकार जानते हैं कि उनके पास नंबर गेम का पावर है. इसलिए वे आराम से वेट एंड वॉच की मुद्रा में हैं. उधर, कांग्रेस के भीतर बेचैनी का आलम यह है कि हर नेता सुबह उठकर पहले अपने फोन का नेटवर्क चेक करता है कि कहीं झामुमो की तरफ से कोई मिस्ड कॉल तो नहीं आया. अब देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली की दौड़ लगाने वाले ये दिग्गज रांची लौटकर विधानसभा काउंटर का रुख करते हैं या फिर नो सिग्नल के इस दौर में कांग्रेस की यह दावेदारी सिर्फ हार्टबीट बढ़ाने और दिल्ली की सैर करने तक ही सीमित रह जाती है.
दिल्ली दरबार की परिक्रमा और हाईकमान का आसरा
जब रांची में नेटवर्क न मिलें, तो कांग्रेसी नेताओं का सीधा रुख दिल्ली की तरफ होता है. झारखंड कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने अपनी अपनी फाइलें दबाईं और दिल्ली दरबार की दौड़ लगा दी है. रेस इतनी तगड़ी है कि मानों मैराथन चल रही हो. सबको लगता है कि 10 जनपथ या मल्लिकार्जुन खड़गे के दफ्तर से कोई ऐसा चमत्कारिक सिग्नल छूटेगा, जो सीधे रांची में झामुमो के टावर को ग्रीन कर देगा.
पर्चा खरीदने की फुर्सत किसे है, जब बॉस का इशारा ही न हो
विधानसभा के काउंटर पर राज्यसभा चुनाव के नामांकन के पर्चे बिक रहे हैं. लोग आ रहे हैं, देख रहे हैं, लेकिन कांग्रेस का कोई भी सूरमा उस काउंटर की तरफ भटकने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है. काउंटर सूना पड़ा है. जेब में दावेदारी का लेटर पैड तो है, लेकिन झामुमो का एनओसी गायब है.
दावेदारों की लंबी फेहरिस्त
- शहजादा अनवर और फुरकान अंसारीः अल्पसंख्यक कोटे से अपनी मजबूत दावेदारी का गणित बिठा रहे हैं.
- सुबोधकांत सहाय और प्रदीप बलमुचूः अनुभव का भारी भरकम वेटेज लेकर दिल्ली में लॉबिंग कर रहे हैं.
- केशव महतो कमलेश और राजेश ठाकुरः संगठन चलाने का तजुर्बा दिखा रहे हैं.
- दयामनि बारला और निरंजन पासवानः जल-जंगल-जमीन और सामाजिक समीकरण पासा फेंक रहे हैं.
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