Hazaribagh : भारत माता चौक से सिंदूर बाईपास (पुराना NH-33) तक प्रस्तावित 107 करोड़ रुपये की सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत होने वाली पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ ‘सेव हजारीबाग’ ने मोर्चा खोल दिया है. इस योजना के विरोध में आज शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, पर्यावरणविदों, अधिवक्ताओं, शिक्षकों और छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त हजारीबाग, पूर्वी व पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी तथा पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को मेमोरेंडम सौंपा.

अध्यक्ष सचिदानंद पाण्डेय के नेतृत्व में सौंपा गया मेमोरेंडम
यह मेमोरेंडम ‘सेव हजारीबाग’ के अध्यक्ष सचिदानंद पाण्डेय के नेतृत्व और कोषाध्यक्ष कृष्णा किशोर प्रसाद, कोर कमेटी के सदस्य सुरजीत नागवाल, मनोज नारायण भगत, धीरज सिंह और आनंद सिंह की उपस्थिति में सौंपा गया. प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि इस 107 करोड़ रुपये के बड़े प्रोजेक्ट की डीपीआर को अब तक पब्लिक डोमेन में क्यों नहीं रखा गया है? हजारीबाग की जनता को कार्य शुरू होने से पहले यह जानने का पूरा हक है कि इस योजना का असली औचित्य क्या है और पेड़ों को बचाने के लिए क्या विकल्प तलाशे गए थे.
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप
ज्ञापन में प्रशासन को याद दिलाया गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसलों (विशेषकर 2021 के आदेश) में पेड़ों को जीवित प्राणी माना है. कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत किसी भी पेड़ को काटने से पहले उसकी उम्र के आधार पर ‘आर्थिक और पर्यावरणीय कीमत’ (ऑक्सीजन और कार्बन सोखने की क्षमता) का आकलन करना अनिवार्य है. हजारीबाग में बिना किसी ऐसे वैज्ञानिक और कानूनी मूल्यांकन के हजारों वृक्षों को काटने की तैयारी की जा रही है, जो सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना है.
मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी
‘सेव हजारीबाग’ ने प्रशासन से मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए वृक्षों की कटाई पर तुरंत रोक लगाई जाए और प्रोजेक्ट की डीपीआर तुरंत सार्वजनिक की जाए. नागरिकों ने साफ कहा है कि यदि बिना डीपीआर सार्वजनिक किए और कानूनी मापदंडों का उल्लंघन कर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने का प्रयास किया गया, तो हजारीबाग की जनता पर्यावरण की रक्षा के लिए न्यायालय की शरण में जाने और शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी. हजारीबाग, भारत माता चौक से सिंदूर बाईपास (पुराना NH-33) तक प्रस्तावित 107 करोड़ रुपये की सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत होने वाली पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ ‘सेव हजारीबाग’ ने मोर्चा खोल दिया है. इस योजना के विरोध में आज शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, पर्यावरणविदों, अधिवक्ताओं, शिक्षकों और छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त हजारीबाग, पूर्वी व पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी तथा पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता को मेमोरेंडम सौंपा.
अध्यक्ष सचिदानंद पाण्डेय के नेतृत्व में सौंपा गया मेमोरेंडम
यह मेमोरेंडम ‘सेव हजारीबाग’ के अध्यक्ष सचिदानंद पाण्डेय के नेतृत्व और कोषाध्यक्ष कृष्णा किशोर प्रसाद, कोर कमेटी के सदस्य सुरजीत नागवाल, मनोज नारायण भगत, धीरज सिंह और आनंद सिंह की उपस्थिति में सौंपा गया. प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि इस 107 करोड़ रुपये के बड़े प्रोजेक्ट की डीपीआर को अब तक पब्लिक डोमेन में क्यों नहीं रखा गया है? हजारीबाग की जनता को कार्य शुरू होने से पहले यह जानने का पूरा हक है कि इस योजना का असली औचित्य क्या है और पेड़ों को बचाने के लिए क्या विकल्प तलाशे गए थे.
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप
ज्ञापन में प्रशासन को याद दिलाया गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसलों (विशेषकर 2021 के आदेश) में पेड़ों को जीवित प्राणी माना है. कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत किसी भी पेड़ को काटने से पहले उसकी उम्र के आधार पर ‘आर्थिक और पर्यावरणीय कीमत’ (ऑक्सीजन और कार्बन सोखने की क्षमता) का आकलन करना अनिवार्य है. हजारीबाग में बिना किसी ऐसे वैज्ञानिक और कानूनी मूल्यांकन के हजारों वृक्षों को काटने की तैयारी की जा रही है, जो सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना है.
मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी
‘सेव हजारीबाग’ ने प्रशासन से मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए वृक्षों की कटाई पर तुरंत रोक लगाई जाए और प्रोजेक्ट की डीपीआर तुरंत सार्वजनिक की जाए. नागरिकों ने साफ कहा है कि यदि बिना डीपीआर सार्वजनिक किए और कानूनी मापदंडों का उल्लंघन कर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने का प्रयास किया गया, तो हजारीबाग की जनता पर्यावरण की रक्षा के लिए न्यायालय की शरण में जाने और शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी.
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