Ranchi: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए पूर्व मंत्री और अनुसूचित जाति के कद्दावर नेता बैजनाथ राम को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है. शनिवार को रांची में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में झामुमो के केंद्रीय महासचिव व मुख्य प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने इस फैसले की घोषणा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान और आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रत्याशी चयन का पूरा अधिकार पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंपा गया था, जिन्होंने व्यापक विचार-विमर्श के बाद बैजनाथ राम के नाम पर मुहर लगाई.

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दलित वोट बैंक और सोशल इंजीनियरिंग
लातेहार क्षेत्र सहित पूरे राज्य के अनुसूचित जाति समाज में बैजनाथ राम की पैठ बेहद मजबूत है. उन्हें राज्यसभा भेजकर हेमंत सोरेन ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दलित और वंचित समाज को एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. यह कदम झामुमो के पारंपरिक आदिवासी-मूलवासी वोट बैंक के साथ ‘दलित’ समीकरण को जोड़ने की एक अचूक कोशिश है.
गठबंधन की एकजुटता का प्रदर्शन
सुप्रियो भट्टाचार्य ने दावा किया कि महागठबंधन के 34 विधायक पूरी एकजुटता के साथ बैजनाथ राम की जीत सुनिश्चित करेंगे. आगामी 8 तारीख (सोमवार) को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और महागठबंधन के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में होने वाला नामांकन इस बात का प्रमाण होगा कि सत्ताधारी दल पूरी तरह से एकजुट है.
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गणितीय सुरक्षा और राजनीतिक परिपक्वता
झारखंड की 6 राज्यसभा सीटों के मौजूदा गणित के अनुसार, विधानसभा की सदस्य संख्या के आधार पर कोई भी एक दल सुरक्षित रूप से एक ही सीट जीत सकता है. झामुमो ने बिना किसी अतिरिक्त जोखिम के अपने संख्या बल (34 विधायक) के भरोसे अपनी सीट सुरक्षित करने का व्यावहारिक फैसला लिया है, जो उनकी राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है.
