Ranchi: राज्य में विभागीय कार्रवाई के बाद पेंशन कटौती और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में अब कोई लापरवाही नहीं चलेगी. झारखंड सरकार भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सुस्ती पर शिकंजा कसने के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुकी है. वित्त विभाग के सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में साफ कर दिया गया है कि पेंशनर्स पर लगने वाले दंड और राशि की निकासी-जमा प्रक्रिया को अब एक बेहद कड़े और पारदर्शी मानक संचालन प्रक्रिया के दायरे में लाया जाएगा. अब ट्रेजरी, बैंक और महालेखाकार कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए गड़बड़ियों के सभी रास्तों को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा.
दंडादेश का अनुपालन और न्यायालय में राशि जमा करने की नई व्यवस्था
विभागीय जांच पूरी होने के बाद नियमों के तहत कई बार कार्मियों और अधिकारियों पर पेंशन कटौती का दंड तो अधिरोपित कर दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर उस आदेश का सही तरीके से अनुपालन नहीं हो पाता. कभी कागजी पेचीदगियों तो कभी विभागों के बीच तालमेल के अभाव में दंडादेश कागजों तक ही सिमटकर रह जाते हैं.

SOP में बड़े संशोधनों के निर्देश
न्यायालय के न्यायादेश के अनुपालन में दण्ड स्वरूप काटी गई राशि को समय पर सही जगह जमा कराने के लिए सरकार एक अचूक व्यवस्था तैयार कर रही है. प्रतिभागियों के सुझावों के आधार पर तैयार हो रहे ड्राफ्ट में कतिपय महत्वपूर्ण संशोधन करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में कोई भी विभाग या एजेंसी नियमों की अनदेखी न कर सके.

बैंक, ट्रेजरी और महालेखाकार की जवाबदेही तय
बैठक के दौरान सीपीपीसी के प्रतिनिधियों ने साफ किया कि प्रथम पेंशन भुगतान के बाद पूरा सिस्टम बैंक के सीपीपीसी और ट्रेजरी लिंक्ड बैंक के जरिए संचालित होता है.यदि पेंशनभोगी एक ही बैंक के भीतर अपनी शाखा बदलते हैं, तो ट्रेजरी लिंक्ड ब्रांच और खाता संख्या पर कोई असर नहीं पड़ता. लेकिन, यदि बैंक बदला जाता है, तो कोषागार को तुरंत सूचित कर पीपीओ को संबंधित बैंक के सीपीपीसी में भेजना अनिवार्य होगा. प्रोजेक्ट भवन कोषागार ने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी पेंशन भुगतानों से जुड़े ‘स्क्रॉल’ उन्हें प्राप्त होते हैं और वे बैंकों को वीडीएमएस प्रदान करते हैं. इसी वीडीएमएस के आधार पर बैंकों को आरबीआई से रीइंबर्समेंट मिलता है और महालेखाकार कार्यालय द्वारा अकाउंटिंग की जाती है. अब यह अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं कि जिला कोषागार कार्यालय से स्क्रॉल को सत्यापित कर अग्रसारित करने के बाद ही प्रोजेक्ट भवन से वीडीएमएस हस्ताक्षरित हो, ताकि पारदर्शिता सौ फीसदी सुनिश्चित हो सके.
संशोधित पीपीओ और रिकवरी पर विशेष SOP
प्रधान महालेखाकार कार्यालय, झारखंड, रांची के प्रतिनिधि ने राहत भरी जानकारी देते हुए बताया कि संशोधित पीपीओ के आलोक में भुगतान के लिए अब पेंशनभोगी के सशरीर उपस्थित होने की कोई आवश्यकता नहीं है. हालांकि, पेंशन मद से रिकवरी की प्रक्रिया को लेकर अकाउंटिंग में आ रही जटिलताओं को देखते हुए सचिव महोदय ने बेहद सख्त कदम उठाया है। उन्होंने साफ निर्देश दिया है कि पेंशन से रिकवरी के मामलों के लिए एक पूरी तरह से अलग और स्वतंत्र मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जाए, ताकि रिकवरी में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या देरी की गुंजाइश न बचे.
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