Ranchi : झारखंड की सियासी फिजां पल-पल बदल रही है. सूबे में राज्यसभा की खाली हो रही दो सीटों के लिए बिछती राजनीतिक बिसात ने राजधानी रांची का तापमान बढ़ा दिया है. गठबंधन सरकार और विपक्ष, दोनों ही खेमों में शह और मात का खेल शुरू हो चुका है. जिससे राज्य की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आने के संकेत मिल रहे हैं.

जेएमएम का दांव और गठबंधन की रस्साकशी
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार घोषित कर फ्रंट फुट पर खेलने की रणनीति अपनाई है. इस घोषणा के तुरंत बाद कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और अजय शर्मा का रांची पहुंचना बेहद अहम है. यह दौरा गठबंधन के भीतर असंतोष को थामने और साझा रणनीति बनाने का प्रयास माना जा रहा है. इसी बीच, उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवाणी का अचानक रांची पहुंचे की खबर और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की खबरें आना, इस चुनाव में निर्दलीय समीकरणों की सुगबुगाहट को हवा दे रहा है.
भाजपा की जमीनी घेराबंदी
दूसरी ओर, भाजपा ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन उसकी तैयारियां युद्धस्तर पर हैं. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन खुद रांची में हैं. उन्होंने पार्टी सांसदों और विधायकों के साथ बैठक कर संगठन को धारदार बनाने के टिप्स दिए हैं. भाजपा की यह खामोशी किसी बड़े उलटफेर की रणनीति का हिस्सा हो सकती है, जिससे सत्ताधारी गठबंधन पूरी तरह सतर्क है.
बड़ा दिलचस्प नजारा है सामने
संख्या बल के लिहाज से सत्ता पक्ष का पलड़ा भले ही भारी दिख रहा हो, लेकिन परिमल नाथवाणी की एंट्री और कांग्रेस आलाकमान की सक्रियता यह बताती है कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा पक रहा है. झारखंड का राज्यसभा चुनाव अब महज एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सियासी पकड़ और विपक्ष की एकजुटता की अग्निपरीक्षा बन चुका है.
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