Hazaribagh : हजारीबाग शहर की असली पहचान और उसकी रूह अगर किसी एक चीज में बसती है, तो वह है यहां की बेहद खूबसूरत झीलें. पूरे झारखंड में हजारीबाग ही इकलौता ऐसा जिला है, जहां एक ही परिसर के भीतर एक साथ पांच-पांच झीलों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. यही वजह है कि जब भी बाहर से कोई मेहमान इस शहर में कदम रखता है, तो स्थानीय लोग बड़े फख्र के साथ उसे सबसे पहले झील की सैर कराने ले जाते हैं. लेकिन आज इसी ऐतिहासिक धरोहर पर जलकुंभी का ऐसा खौफनाक कब्जा हो चुका है कि शहर की यह खूबसूरत पहचान धीरे-धीरे दम तोड़ रही है. प्रशासन की अनदेखी ने इस खूबसूरत पर्यटन स्थल को बदहाली के आंसू रोने पर मजबूर कर दिया है.

दिखावे की सफाई और कागजों पर तैरती 2 करोड़ की मशीनें
गांधी स्मारक के पास स्थित झील की हालत चिंताजनक है. दूर से देखने पर झील किसी हरे मैदान जैसी नजर आती है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा जलकुंभी की मोटी परत से ढक चुका है. हैरानी की बात यह है कि कुछ समय पहले झीलों की सफाई के लिए करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक जलकुंभी हटाने वाली मशीनें खरीदी गई थीं, लेकिन उनकी उपयोगिता पर अब सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. देवेंद्र सिंह देव के अनुसार, झील में जलकुंभी लगातार फैल रही है, जबकि सफाई व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित दिख रही है. जलकुंभी के कारण पानी में धूप नहीं पहुंच रही, जिससे ऑक्सीजन का स्तर घट रहा है और मछलियों की मौत हो रही है. मरी हुई मछलियों और सड़ते पौधों से उठ रही दुर्गंध के कारण मॉर्निंग वॉकर्स और पर्यटकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
मेयर अरविंद राणा का 13 करोड़ का मेगा प्लान, ग्लास ब्रिज और नो-व्हीकल जोन का सपना
मेयर अरविंद राणा ने झील की बदहाल स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि इसे फिर से सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए नगर निगम एक बड़े पुनरुद्धार प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. उन्होंने बताया कि करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से गांधी स्मारक झील और उसके पीछे स्थित दो अन्य झीलों की सफाई की जाएगी. झीलों से गाद निकालकर उन्हें आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे एक विशाल जलाशय का निर्माण होगा. मेयर के अनुसार, इस परियोजना की सबसे खास बात झील में बनने वाला ग्लास ब्रिज होगा, जो पर्यटन के लिहाज से नया आकर्षण बनेगा. इसके अलावा झील परिसर को नो-व्हीकल जोन के रूप में विकसित करने की भी योजना है, ताकि लोगों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके. उन्होंने भरोसा जताया कि परियोजना पूरी होने के बाद हजारीबाग की यह ऐतिहासिक झील राज्य ही नहीं, बल्कि देशभर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी और शहर की पहचान को नई ऊंचाई मिलेगी.
जनता की अदालत में सुलगते सवाल: क्या जमीनी हकीकत बनेगा यह आलीशान सपना
मेयर के इस बेहद भव्य और सकारात्मक बयान के बाद अब हजारीबाग की जनता के बीच उम्मीदें और सस्पेंस दोनों काफी बढ़ गए हैं. एक तरफ जहां वर्तमान में 2 करोड़ की मशीनें होने के बावजूद झील जलकुंभी के दलदल में फंसी है, वहीं दूसरी तरफ 13 करोड़ के इस नए प्रोजेक्ट, ग्लास ब्रिज और नो-व्हीकल जोन की योजना ने लोगों के भीतर एक नया कौतूहल पैदा कर दिया है. अब देखना यह होगा कि मेयर अरविंद राणा का यह ड्रीम प्रोजेक्ट कितनी जल्दी धरातल पर उतरता है और क्या वे वाकई साल 2016 वाले उस पुराने साफ-स्वच्छ स्वरूप को वापस लाकर हजारीबाग को देश के टॉप शहरों में शामिल करा पाते हैं. फिलहाल, शहर का हर नागरिक इस भारी जलकुंभी के बीच इस 13 करोड़ वाले नए बदलाव का बेसब्री से इंतजार कर रहा है.
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