Chaibasa : जिला में रसोईया और संयोजिकाओं के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिसकी अध्यक्षता डीसी मनीष कुमार ने की. कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और पौष्टिक मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने, पोषण स्तर में सुधार लाने और विद्यालय आधारित स्वास्थय स्वच्छता गतिविधियों को सुदृढ़ करना रहा. इस दौरान डीसी मनीष कुमार ने कहा कि बच्चों के समग्र विकास में शिक्षा और पोषण दोनों की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका होती है. एक स्वस्थ और पोषित बच्चा ही बेहतर तरीके से शिक्षा ग्रहण कर सकता है. विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास का भी महत्वपूर्ण मंच है.

मध्यान्ह भोजन में पौष्टिकता, गुणवत्ता और स्वच्छता हो प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में तैयार किए जाने वाले मध्यान्ह भोजन में पौष्टिकता, गुणवत्ता और स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए. भोजन तैयार करने के दौरान निर्धारित मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जायें. और खाद्य सामग्री के चयन से लेकर भोजन परोसने तक की पूरी प्रक्रिया में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जायें. उन्होंने हर विद्यालय में पोषण वाटिका तैयार करने की बात कहीं.
रसोईया एवं संयोजिकाओं को दें प्रशिक्षण
डीसी ने कहा कि विद्यालयों में कार्यरत रसोईया एवं संयोजिकाओं को समय समय पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना चाहिये. जिससे वे खाद्य सुरक्षा, पोषण संतुलन, स्वच्छता मानकों, भोजन निर्माण की वैज्ञानिक पद्धति एवं सुरक्षित खाद्य प्रबंधन से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकें. इसके साथ ही सभी विद्यालयों में महीने की 20 तारीख को पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित करने की बात कहीं गयी. जिससे बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सकें. कार्यक्रम में शिक्षा कार्यालय के एपीओ, बीआरपी, सीआरपी सहित तकरीबन 1500 रसोईया एवं संयोजिकाओं की सक्रिय सहभागिता रही.
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