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उत्पाद सिपाही भर्ती पेपर लीक : गिरोह के सदस्य की जमानत पर अगली सुनवाई 12 जून को

Ranchi : सिविल कोर्ट में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और धांधली मामले से जुड़े गिरोह के सदस्य मोनू कुमार...

Ranchi : सिविल कोर्ट में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और धांधली मामले से जुड़े गिरोह के सदस्य मोनू कुमार की जमानत पर सोमवार को सुनवाई हुई. जिसमें अभियोजन की ओर से समय की मांग की गयी. उसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 जून की तिथि निर्धारित की है. आरोपी के अधिवक्ता की ओर से हवाला दिया गया है कि जब जेएसएससी मान रही है कि पेपर लीक नहीं हुआ है तो पेपर लीक करने का आरोप निराधार है. उसके बाद आरोपी मोनू कुमार अंतरराज्यीय पेपर लीक और पेपर सॉल्वर गिरोह के सदस्य हैं. इनके पूर्व गिरोह के मास्टर माइंड अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार, और योगेश प्रसाद को भी गिरफ्तार किया जा चुका है. मामले में गत आठ मई को 154 अभ्यर्थियों को अदालत ने जमानत दे दी थी.

क्या है मामला

बताते चले कि उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा 13 अप्रैल को आयोजित होने वाली थी. 12 अप्रैल की रात अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाये जा रहे थे. उसी दौरान तमाड पुलिस ने उक्त अरोपियों को गिरफ्तार किया था. मामले अभ्यर्थियों सहित 166 आरोपियों को तमाड पुलिस ने रडगांव से गिरफ्तार किया था. उसमें सात महिला अभ्यर्थी, पांच मास्टर माइंड सहित 164 आरोपी शामिल हैं. जमानत के लिए 78 याचिका दाखिल की गयी थी. मामले में तीन बार से अधिक सुनवाई हो चुकी है. अदालत ने सुनवाई के दौरान केस डायरी की मांग की है, लेकिन तमाड़ पुलिस ने केस डायरी प्रस्तुत नहीं की जिसके कारण सुनवाई तीन बार टल चुकी है. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने केस डायरी पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा और बताया कि मामले के कई पहलुओं पर अभी जांच जारी है. इस पर अदालत ने अंतिम मौका देते हुए अगली तारीख तक हर हाल में केस डायरी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.

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नर्सिंग कॉलेज में छापेमारी के दौरान हुआ खुलासा

गौरतलब है कि तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज में पुलिस छापेमारी के दौरान इस बड़े रैकेट का खुलासा हुआ था. जांच में सामने आया कि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर रटवायें जा रहे थे और संगठित गिरोह इस धांधली को अंजाम दे रहा था. अभ्यर्थियों से परीक्षा के पहले तीन लाख व उसके बाद नियुक्ति के समय 10 लाख रुपये पर देना तय किया गया था. लेकिन रडगांव में इतनी संख्या लोगों के जमा हाने पर ग्रामीणों को नक्सली या आपराधिक गतिविधियों का शक होने पर पुलिस को सुचना दी थी. उसके बाद मामले का खुलासा हुआ था.

 

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