Hazaribagh: शहर के परिसदन में हजारीबाग प्रमंडल के छात्र संघ एवं विभिन्न छात्र संगठनों के युवा प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई. छात्र नेताओं ने शिक्षा, छात्रावास, छात्रवृत्ति और आरक्षण से संबंधित मांगों को प्रमुखता से उठाया.

छात्रवृत्ति भुगतान में देरी पर जताई चिंता
बैठक के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति राशि के भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इस पर आश्वासन दिया गया कि छात्रवृत्ति भुगतान में तेजी लाने के लिए आवश्यक पहल की जाएगी.
BIT मेसरा में आरक्षण कोटा बहाल करने की मांग
छात्र नेताओं ने BIT मेसरा, रांची में झारखंडी छात्र-छात्राओं के लिए पूर्व में उपलब्ध आरक्षण कोटा समाप्त किए जाने पर आपत्ति जताई. प्रतिनिधियों ने आदिवासी, दलित, पिछड़ा एवं अन्य वर्गों के लिए पहले की तरह 50 प्रतिशत आरक्षण कोटा पुनः लागू करने की मांग की. उनका कहना था कि इससे राज्य के वंचित वर्गों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे.
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पांच जिलों में नए छात्रावास बनाने की मांग
बैठक में हजारीबाग प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, गिरिडीह और रामगढ़ जिलों में पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए नए छात्रावासों के निर्माण की मांग भी उठाई गई. छात्र नेताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को छात्रावास की सुविधा मिलने से उच्च शिक्षा प्राप्त करने में बड़ी मदद मिलेगी.
विनोबा भावे विश्वविद्यालय में सुविधाएं बहाल करने की मांग
प्रतिनिधियों ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय परिसर में वर्षों पहले निर्मित छात्रावासों को पुनः चालू करने तथा लंबे समय से बंद पड़े स्टेडियम को शुरू करने की मांग रखी. उनका कहना था कि इससे छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधा के साथ-साथ खेलकूद और शारीरिक विकास के लिए भी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे.
जातीय जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम की मांग
बैठक में जातीय जनगणना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. छात्र नेताओं ने ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग करते हुए कहा कि इससे पिछड़े वर्गों की वास्तविक जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन संभव हो सकेगा, जिससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा.
