Chatra: चतरा जिले के टंडवा प्रखंड में एनटीपीसी केरेडारी कोल माइंस से वृन्दा मुख्य सड़क तक निर्माणाधीन कोयला ट्रांसपोर्टिंग रोड का विवाद गहरा गया है. दो दिन पूर्व हुए विरोध प्रदर्शन के जवाब में सोमवार को आधा दर्जन गांवों के रैयतों ने वृन्दा देवी मंडप के पास एक विशाल महाजुटान सह ग्रामसभा का आयोजन किया. इस महासभा में स्थानीय किसानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने एक स्वर में रोड निर्माण का पुरजोर समर्थन किया. ग्रामसभा की अध्यक्षता कबरा पंचायत के मुखिया सह झामुमो जिला अध्यक्ष नीलेश उर्फ सोनू सिन्हा ने की, जिसमें टंडवा अंचलाधिकारी (सीओ) गौरव राय भी शामिल हुए. कढमदीरी, सिसय, उरदा, खधैया, वृन्दा और गोपदा गांव के प्रभावित किसानों ने कहा कि इस रोड के बनने से इलाके में रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे. सभा को संबोधित करते हुए झामुमो जिला अध्यक्ष नीलेश सिन्हा विरोधियों पर जमकर बरसे. उन्होंने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि रोड का विरोध करने वाले दलाल वक्त रहते सुधर जाएं, वरना रैयत उन्हें खदेड़ देंगे.

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सड़क निर्माण के लिए किसान पूरी तरह स्वतंत्र
मौके पर मौजूद टंडवा सीओ गौरव राय ने साफ किया कि रैयती जमीन पर सड़क निर्माण के लिए किसान पूरी तरह स्वतंत्र हैं, बशर्ते सरकारी जमीन आने पर नियमानुसार मुआवजा देना होगा. दरअसल, एनटीपीसी द्वारा 800 करोड़ की लागत से कोयला डिस्पैच करने की इस योजना का ठेका जेआरएल ट्रांसपोर्ट कंपनी के पास है. कंपनी ने साढ़े पांच किलोमीटर की सड़क के लिए 300 किसानों से 11 साल की लीज पर जमीन ली है. वहीं, नक्कास कंपनी भी इसी क्षेत्र में सक्रिय है. जमीन लीज और ठेके के इसी कॉरपोरेट वर्चस्व के चलते क्षेत्र में भारी गुटबाजी और विरोध का दौर चल रहा है.

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