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कोयले की काली कोख में दफन होती मजदूरों की जिंदगी, बड़कागांव से रामगढ़ तक मौत का वही काला खेल

Hazaribagh : बड़कागांव थाना क्षेत्र स्थित बादम कोल परियोजना के समीप राउतपाड़ा में अवैध कोयला खनन के दौरान चाल धंसने से एक...

The dying lives of workers in coal mines

Hazaribagh : बड़कागांव थाना क्षेत्र स्थित बादम कोल परियोजना के समीप राउतपाड़ा में अवैध कोयला खनन के दौरान चाल धंसने से एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर घायल हो गए। मृतक की पहचान सचिन साव के रूप में हुई है. इस घटना के बाद एक बार फिर कोयलांचल क्षेत्र में अवैध खनन, मजदूरों की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हादसे के बाद मृतक के शव का बिना पोस्टमार्टम कराए जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया. क्षेत्र में चर्चा है कि पुलिस कार्रवाई, कानूनी प्रक्रिया और अवैध खनन के खुलासे के डर से ऐसा कदम उठाया गया. हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. कोयलांचल क्षेत्र में इससे पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां अवैध खदानों में हादसों के बाद घटनाओं को दबाने और साक्ष्य छिपाने के आरोप लगते रहे हैं.

पहले भी हो चुके हैं कई बड़े हादसे

हजारीबाग, रामगढ़ और आसपास के कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन के दौरान हादसे कोई नई बात नहीं हैं. कुछ समय पहले रामगढ़ जिले के भुरकुंडा सौंदा डी क्षेत्र में चाल धंसने से चार मजदूरों की मौत हो गई थी. वहीं केरेडारी, बड़कागांव, चुरचू और कटकमदाग क्षेत्रों में भी अवैध खनन के दौरान कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें मजदूरों की जान गई है या वे गंभीर रूप से घायल हुए हैं. इन सभी घटनाओं में एक समानता देखने को मिलती है. अवैध मुहानों के जरिए कोयला निकालना, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और हादसे के बाद जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई का नहीं पहुंच पाना.

प्रशासनिक निगरानी पर उठ रहे सवाल

अवैध खनन में शामिल अधिकांश मजदूर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं. रोजगार के सीमित विकल्पों के कारण वे जान जोखिम में डालकर खदानों में उतरते हैं. दूसरी ओर, इस कारोबार से जुड़े कथित माफिया और संचालक सीधे तौर पर जोखिम से दूर रहते हैं, जबकि हादसों का खामियाजा मजदूरों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ता है. ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध कोयला खनन और परिवहन का काम चल रहा है. उनका कहना है कि यदि अवैध कोयले की ढुलाई खुलेआम हो रही है तो संबंधित विभागों और प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं है. हादसे के बाद लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आखिर अवैध खनन पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है. घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है. स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. अब नजर प्रशासन और खनन विभाग की कार्रवाई पर टिकी है कि वे इस हादसे की गहराई से जांच कर जिम्मेदार लोगों तक पहुंचते हैं या नहीं.

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