Palamu: देश को आजाद हुए दशक बीत गए. डिजिटल इंडिया की बातें हर तरफ हैं. लेकिन पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत अवसाने गांव के बरवा टोला में आज भी ग्रामीण एक बुनियादी हक के लिए तरस रहे हैं. वह हक है – एक अदद साफ और पक्की सड़क.
बरसात में दलदल बना रास्ता

यह चैनपुर प्रखंड के अवसाने गांव के बरवा टोला का मुख्य रास्ता है, जो बरसात आते ही दलदल में तब्दील हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि यहां पैदल चलना भी मौत को दावत देने जैसा है. बरसात का मौसम यहां के लोगों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है.
बीमारों के लिए बढ़ती मुश्किल
सबसे खौफनाक स्थिति तब होती है, जब गांव में कोई बीमार पड़ जाए. अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस का आना तो दूर, लोग मरीज को खटिया पर लादकर ले जाने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का एक ही दर्दभरा सवाल है – “देश तो आजाद है, लेकिन हमें इस नरक और बरसात की लाचारी से आजादी कब मिलेगी?”
हैरानी की बात यह है कि जनता ने जिस पंचायत मुखिया को अपनी आवाज उठाने के लिए चुना, वह अब बहरे हो चुके हैं. ग्रामीण शिकायतें कर-करके थक चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक अमला और स्थानीय जनप्रतिनिधि कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं.
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वादे और हकीकत
चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज इस कीचड़ में पैर रखने से भी कतराते हैं. चैनपुर प्रखंड के ये ग्रामीण अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि समाधान चाहते हैं. इस विषय पर जब पंचायत मुखिया जितेंद्र यादव से बात करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.


