Hazaribagh: बरही शहर से करीब दो किलोमीटर दूर बेंदगी पंचायत के पोड़ैया गांव में ग्रामीणों द्वारा लगाया गया बैरियर और उससे जुड़े नियम इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं. तिलैया डैम की जवाहर घाटी की मनोरम वादियों में स्थित इस क्षेत्र में ग्रामीणों ने पिकनिक और शराब पार्टी पर रोक लगाने के लिए स्वयं नियम लागू कर दिए हैं. इस कदम को जहां ग्रामीण अपनी सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं इसकी कानूनी वैधता को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं.
बैरियर पर लिखे गए सख्त नियम
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए बैरियर पर एक सूचना बोर्ड लगाया गया है, जिसमें नहाने का समय सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक निर्धारित किया गया है. इसके अलावा शराब पार्टी करते पकड़े जाने पर प्रति व्यक्ति 500 रुपये जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी गई है. बोर्ड में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह व्यवस्था ग्रामीणों की ओर से लागू की गई है.

बाहरी लोगों की गतिविधियों से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि यह इलाका प्राकृतिक सुंदरता के कारण पिकनिक स्पॉट के रूप में लोकप्रिय हो चुका है. बरही समेत आसपास के क्षेत्रों और दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. कई बार कुछ लोग शराब के नशे में हंगामा करते हैं, कांच की बोतलें तोड़कर गंदगी फैलाते हैं और विरोध करने पर ग्रामीणों को धमकाते हैं.ग्रामीणों के अनुसार, ऐसी घटनाओं के कारण गांव में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था. उनका दावा है कि पहले यहां गोलीबारी जैसी गंभीर घटना भी हो चुकी है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई.
हालिया घटना के बाद लिया गया फैसला
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में बिहार से आए कुछ लोगों द्वारा क्षेत्र में शराब पार्टी किए जाने का मामला सामने आया था, जिसमें बरही के कुछ लोग भी शामिल थे. देर शाम ग्रामीणों ने कुछ लोगों को पकड़कर विरोध जताया. बाद में प्रशासन के सहयोग से मामला शांत कराया गया. इसी घटना के बाद गांव में बैठक आयोजित कर सुरक्षा के मद्देनजर निजी जमीन पर बैरियर लगाने और नियम लागू करने का निर्णय लिया गया.
परिवार के साथ आने वालों पर नहीं है रोक
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है. स्थानीय लोग और परिवार के साथ घूमने आने वाले पर्यटकों को किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं की जाती. उनकी आपत्ति केवल शराब सेवन, उत्पात और असामाजिक गतिविधियों से है.
कानूनी वैधता पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों के इस कदम ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. सवाल उठ रहे हैं कि यदि यह क्षेत्र वन विभाग या किसी सरकारी भूमि के अधीन आता है, तो बिना प्रशासनिक अनुमति बैरियर लगाना और जुर्माना वसूलना कितना वैध है. कानूनी जानकारों का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर जुर्माना लगाने का अधिकार सामान्यतः प्रशासन या संबंधित विभागों के पास होता है. ऐसे में इस व्यवस्था की वैधता की जांच आवश्यक हो सकती है.
प्रशासन और वन विभाग की भूमिका पर नजर
मामले को लेकर अब स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की भूमिका पर भी नजरें टिकी हैं. यदि बैरियर निजी भूमि पर लगाया गया है तो स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन यदि यह सरकारी या वन भूमि के दायरे में आता है तो संबंधित विभागों को स्थिति स्पष्ट करनी होगी.
ग्रामीणों ने बताया सुरक्षा का उपाय
ग्रामीण गोबिंद यादव, महेश यादव, मुकेश यादव, संजय यादव और काली यादव समेत कई युवाओं ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम गांव की सुरक्षा, शांति और पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया गया है. उनका कहना है कि प्रशासनिक सहायता सीमित होने के कारण ग्रामीणों को स्वयं आगे आना पड़ा.
सुरक्षा बनाम कानून की बहस
फिलहाल पोड़ैया गांव का यह ‘ग्रामीण फरमान’ इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है. एक ओर ग्रामीण इसे सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास बता रहे हैं, तो दूसरी ओर इसके कानूनी पक्ष पर सवाल खड़े हो रहे हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इसे ग्रामीण पहल के रूप में स्वीकार करता है या कानून के दायरे में इसकी समीक्षा कर कोई कार्रवाई करता है.
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