Koderma: मरकच्चो प्रखंड क्षेत्र में वन संपदा की लगातार हो रही अवैध कटाई को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि बेला बहादुरपुर स्थित कर्बला मैदान के समीप नदी किनारे, पंदना जंगल तथा अन्य क्षेत्रों में लकड़ी माफिया बड़े पैमाने पर हरे-भरे और पुराने पेड़ों की कटाई कर रहे हैं. इससे क्षेत्र की हरियाली और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार वृक्षारोपण और जंगल बचाने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर अवैध कटाई का सिलसिला लगातार जारी है. ऐसे में पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
ग्रामीणों की सतर्कता से उजागर हुआ मामला
बताया जाता है कि बेला बहादुरपुर क्षेत्र में नदी किनारे कटे हुए पेड़ों की लकड़ी एक पिकअप वाहन पर लोड की जा रही थी. इसी दौरान खेतों की ओर गए ग्रामीणों की नजर इस गतिविधि पर पड़ी. ग्रामीणों द्वारा पूछताछ किए जाने पर कथित लकड़ी माफिया जल्दबाजी में वाहन से लकड़ी उतारने लगे और मौके से भागने का प्रयास किया. भागने के दौरान वाहन नदी किनारे फंस गया, जिसके बाद चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि लकड़ी तस्करी में इस्तेमाल किए जाने वाले कई वाहन बिना नंबर प्लेट, रजिस्ट्रेशन, फिटनेस, बीमा और प्रदूषण प्रमाणपत्र के सड़कों पर चल रहे हैं. इसके बावजूद उन पर कार्रवाई नहीं हो रही है.

आरा मिलों तक पहुंचाई जाती है लकड़ी
ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पहले जंगलों के सुनसान इलाकों में शीशम, एकेशिया समेत अन्य पेड़ों को काटकर छोड़ दिया जाता है. बाद में लकड़ियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पिकअप वाहनों के माध्यम से कोडरमा से सटे गिरिडीह जिले के आरा मिलों तक पहुंचाया जाता है, जहां उनकी बिक्री कर मोटी कमाई की जाती है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि इसी तरह जंगलों की कटाई जारी रही तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र की वन संपदा पूरी तरह समाप्त हो सकती है. उन्होंने वन विभाग से अवैध कटाई रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई जरूरी है.
अवैध कटाई का नया तरीका
ग्रामीणों का दावा है कि लकड़ी माफियाओं ने अब परमिट प्रक्रिया से बचने के लिए नया तरीका अपना लिया है. वे बिना अनुमति पेड़ों की कटाई कर लेते हैं और पकड़े जाने की स्थिति में मामूली जुर्माना भरकर मामला निपटाने की कोशिश करते हैं. इससे अवैध कटाई का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है.
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