Click Here
Click Here
Click Here

मुहर्रम पर लोहरदगा में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल, एक ही परिसर में इमामबाड़ा और राधा-कृष्ण मंदिर में निभाई जाती है वर्षों पुरानी परंपरा

Lohardaga: मुहर्रम का पर्व लोहरदगा में आपसी भाईचारे, सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल के साथ मनाया जा रहा है. शहर...

Muharram
मुहर्रम पर लोहरदगा में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

Lohardaga: मुहर्रम का पर्व लोहरदगा में आपसी भाईचारे, सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल के साथ मनाया जा रहा है. शहर के तेतरतर स्थित एक ऐसा धार्मिक स्थल इन दिनों विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां एक ही परिसर में इमामबाड़ा और राधा-कृष्ण मंदिर स्थित है. वर्षों से चली आ रही यह परंपरा हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है. मुहर्रम की नवमी के अवसर पर बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग तेतरतर स्थित इमामबाड़ा पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया. यहां मौलवी एवं मौलाना द्वारा फातिहा पढ़ी गई तथा देश, राज्य और जिले में अमन-चैन एवं खुशहाली की दुआ मांगी गई. खास बात यह रही कि जिस परिसर में इमामबाड़ा स्थित है, वहीं राधा-कृष्ण का मंदिर भी मौजूद है, जहां हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है.

कई दशकों से चली आ रही यह परंपरा

स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है. इमामबाड़े में जहां मुस्लिम समाज के लोग श्रद्धा के साथ धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं, वहीं मंदिर में पुरोहित द्वारा नियमित रूप से पूजा-अर्चना संपन्न कराई जाती है. दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हुए इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. यही कारण है कि यह स्थल लोहरदगा में सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है.

मुहर्रम के अवसर पर यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं ने भी इस परंपरा की सराहना करते हुए कहा, कि वर्तमान समय में जब समाज को एकता और सद्भाव की आवश्यकता है, तब तेतरतर का यह स्थल लोगों को प्रेम, भाईचारे और परस्पर सम्मान का संदेश देता है. यहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है, बल्कि सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए धार्मिक कार्यक्रमों में सहयोग करते हैं.

इस स्थल की पहचान ही आपसी सौहार्द और एकता है

कार्यक्रम के दौरान सदर जनाब रऊफ अंसारी ने कहा, कि यह परंपरा पूर्वजों से चली आ रही है और सभी लोग मिल-जुलकर इसे निभाते हैं. उन्होंने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग और भाईचारे का संदेश देने वाला अवसर भी है. वहीं सेक्रेटरी जनाब शाहिद अहमद बेलू ने कहा कि इस स्थल की पहचान ही आपसी सौहार्द और एकता है, जिसे सभी समुदायों के सहयोग से संरक्षित रखा गया है.

इस अवसर पर नायाब सेक्रेटरी आरिफ हुसैन बबलू, अब्दुल कादिर, इम्तियाज, सेराज अंसारी, परमानंद मिश्रा, केशव मिश्रा, बागीश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे. सभी ने एक स्वर में सामाजिक एकता, भाईचारे और शांति बनाए रखने का संदेश दिया. मुहर्रम के पावन अवसर पर तेतरतर स्थित यह धार्मिक स्थल एक बार फिर यह साबित कर रहा है, कि लोहरदगा की पहचान केवल उसकी सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच मौजूद मजबूत भाईचारा और आपसी विश्वास भी है.

यह भी पढ़ें: चाईबासा: सिलपुंजी से 60 वर्षीय अज्ञात महिला का शव बरामद, लू लगने से मौत की आशंका

add1

 

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *