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हजारीबाग: इचाक की ऐतिहासिक धरोहरें उपेक्षा की शिकार, पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग तेज

Hazaribagh: ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध इचाक प्रखंड आज अपने प्राचीन मंदिरों, तालाबों और अखाड़ों की बदहाल स्थिति को...

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Hazaribagh: ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध इचाक प्रखंड आज अपने प्राचीन मंदिरों, तालाबों और अखाड़ों की बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है. कभी पूरे क्षेत्र की पहचान रहे ये ऐतिहासिक धरोहर स्थल आज संरक्षण और रखरखाव के अभाव में जर्जर होते जा रहे हैं. स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए राज्य सरकार से इचाक को पर्यटन स्थल घोषित करने तथा ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए विशेष योजना शुरू करने की मांग की है. इचाक प्रखंड में स्थित अनेक प्राचीन मंदिर, विशाल तालाब और पारंपरिक अखाड़े वर्षों से धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक एकता के केंद्र रहे हैं. दूर-दराज़ से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों में भाग लेने पहुंचते रहे हैं. लेकिन समय के साथ इन ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति लगातार खराब होती चली गई. कई तालाब अतिक्रमण और गंदगी की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि कई मंदिर और अखाड़े मरम्मत के अभाव में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं.

इचाक मंदिरों और तालाबों का गढ़, वर्तमान स्थिति शर्मनाक‘: ओम प्रकाश मेहता

 भाजपा नेता एवं पूर्व सांसद प्रतिनिधि ओम प्रकाश मेहता ने कहा कि इचाक मंदिरों एवं तालाबों का गढ़ माना जाता है, लेकिन इनकी वर्तमान स्थिति पूरे प्रखंड के लिए निंदनीय और शर्मसार करने वाली है. उन्होंने कहा कि सरकार को अविलंब इन ऐतिहासिक धरोहरों की मरम्मत, संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए पहल करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि इचाक को पर्यटन स्थल घोषित कर यहां की धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का समुचित विकास किया जाए तो न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे.

धरोहर हमारी संस्कृति और इतिहास की पहचान‘: नंद किशोर मेहता

 मुखिया नंद किशोर मेहता ने कहा कि इचाक के मंदिर, तालाब और अखाड़े केवल ईंट-पत्थरों की संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली इतिहास के जीवंत प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्थानीय नागरिक का दायित्व है कि वह इन धरोहरों के संरक्षण के लिए आगे आए. उन्होंने कहा कि इचाक की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत पर पूरे क्षेत्र को गर्व है और इसे सुरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है.

सामूहिक प्रयास से ही बचेगी ऐतिहासिक विरासत

क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि इचाक की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों को भी मिलकर अभियान चलाना होगा. ग्रामीणों ने मांग की कि सरकार इचाक के सभी ऐतिहासिक मंदिरों, तालाबों और अखाड़ों का सर्वेक्षण कर विशेष विकास योजना तैयार करे तथा इनके संरक्षण, जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य शीघ्र शुरू कराया जाए.

धरोहर नहीं बची तो इतिहास से कट जाएंगी आने वाली पीढ़ियां

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ियां अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से वंचित हो जाएंगी. लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से इचाक को धार्मिक एवं पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की मांग की है.

धार्मिक न्यास बोर्ड प्रदेश अध्यक्ष जयशंकर पाठक ने उठाया संरक्षण का बीड़ा

इसी बीच इचाक की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए धार्मिक न्यास बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष जयशंकर पाठक ने अपने निजी खर्च से इचाक स्थित ऐतिहासिक रामजानकी छोटा अखाड़ा एवं काल भैरव मंदिर (भैरव मठ) की विशेष मरम्मत कराने की घोषणा की है.

रामजानकी छोटा अखाड़ा में हुआ भूमिपूजन

महंत विजयानंद दास की उपस्थिति में गुरुवार को रामजानकी छोटा अखाड़ा के विशेष मरम्मत कार्य का विधिवत भूमिपूजन किया गया. इस अवसर पर जयशंकर पाठक ने कहा कि इचाक मंदिरों की नगरी के रूप में विख्यात है, लेकिन संरक्षण के अभाव में कई ऐतिहासिक मंदिर अपनी पहचान खोते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इन धरोहरों को बचाना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है. मरम्मत कार्य का पूरा खर्च वह स्वयं वहन करेंगे तथा समाज के इच्छुक लोगों से भी इस पुनीत कार्य में सहयोग करने की अपील की.

कभी साधु-संतों का प्रमुख केंद्र था रामजानकी छोटा अखाड़ा

जयशंकर पाठक ने बताया कि रामजानकी छोटा अखाड़ा कभी देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले साधु-संतों का प्रमुख ठिकाना हुआ करता था, लेकिन उपेक्षा के कारण इसकी ऐतिहासिक पहचान धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है. ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का पुनर्जीवन समय की आवश्यकता है.

काल भैरव मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर हुई बैठक

भूमिपूजन के बाद काल भैरव मंदिर (भैरव मठ) की विशेष मरम्मत को लेकर एक बैठक आयोजित की गई. बैठक में जयशंकर पाठक, उपाध्यक्ष शशि मोहन सिंह, कांग्रेस नेत्री रेणु कुमारी, पुराना इचाक पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि रविशंकर उर्फ भोला सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे. बैठक में मंदिर के जीर्णोद्धार, परिसर के विकास और संरक्षण को लेकर विस्तार से चर्चा हुई.

चारदीवारी निर्माण की मांग, सीमेंट उपलब्ध कराने की घोषणा

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए चारदीवारी निर्माण की मांग रखी. वहीं मुखिया प्रतिनिधि रविशंकर उर्फ भोला ने पूरे निर्माण कार्य के लिए आवश्यक सीमेंट उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी लेने की घोषणा की.

पर्यटन के रूप में विकसित हो सकता है इचाक

जयशंकर पाठक ने कहा कि इचाक के सभी ऐतिहासिक और जीर्ण-शीर्ण मंदिरों का संरक्षण कर उन्हें नई पहचान दिलाना जरूरी है. यदि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का समुचित विकास किया जाए तो इचाक को एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है. इससे न केवल क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी नई दिशा मिलेगी. धरोहर संरक्षण की मांग और धार्मिक न्यास बोर्ड की इस पहल को स्थानीय लोगों ने सराहनीय बताते हुए उम्मीद जताई है कि अब सरकार भी इचाक की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और विकास के लिए ठोस कदम उठाएगी.

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