Koderma : सदर थाना क्षेत्र के लोकाई के समीप शनिवार को अवैध ढिबरा (माइका अपशिष्ट) लदा एक पिकअप वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हादसे के बाद चालक समेत वाहन पर सवार अन्य लोग मौके पर वाहन छोड़कर फरार हो गए. घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. विभाग ने क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त पिकअप वाहन को जब्त कर वन प्रक्षेत्र कार्यालय परिसर में पहुंचाया. फिलहाल वन विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और फरार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.
अवैध माइका खनन से जंगलों पर गहराता संकट
कोडरमा, डोमचांच थाना क्षेत्र तथा वाइल्ड लाइफ के छतरबर वन क्षेत्र में इन दिनों अवैध माइका खनन तेजी से फैल रहा है. इससे जंगलों और वन्यजीवों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. जानकारी के अनुसार, रामगोविंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RIT) से करीब दो किलोमीटर अंदर शुरू होकर लगभग आठ किलोमीटर तक फैले वन क्षेत्र में खनन माफियाओं ने 50 से अधिक छोटे-बड़े अवैध खदान बना दिए हैं. यह पूरा इलाका वन्यजीव आश्रयणी के रूप में अधिसूचित है, जहां किसी भी प्रकार की गैर-वानिकी गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसके बावजूद दिन-रात अवैध खनन, भारी मशीनों का संचालन और विस्फोट किए जा रहे हैं, जिससे जंगल का प्राकृतिक संतुलन लगातार बिगड़ रहा है.

हाथियों के प्राकृतिक आवास पर भी असर
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह क्षेत्र कभी जंगली हाथियों का स्थायी आवास हुआ करता था. लेकिन लगातार हो रहे विस्फोट, अवैध खनन और जंगलों की कटाई के कारण हाथी अपने प्राकृतिक आवास छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. इसी वजह से हाथियों का झुंड अब कोडरमा और रजौली अनुमंडल क्षेत्र के गांवों की ओर रुख कर रहा है, जहां फसलों को नुकसान पहुंचाने और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं. इससे ग्रामीणों में भी भय का माहौल है. वन विभाग का कहना है कि जब्त किए गए वाहन के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है. वाहन मालिक, चालक और अवैध खनन से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ वन एवं खनन कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी. वहीं, वन क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए निगरानी भी तेज करने की तैयारी की जा रही है.
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