Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना (PM Nutrition Power Building Scheme) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में योजना के प्रभावी संचालन, भोजन की गुणवत्ता और बच्चों को पौष्टिक मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई. उपायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि योजना के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सभी विद्यालयों में निर्धारित साप्ताहिक मेनू के अनुसार स्वच्छ, सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और समय पर मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए.
आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड शत-प्रतिशत बनाया जाए
बैठक में फल वितरण, खाद्यान्न आवंटन, पूरक पोषण आहार, LPG गैस की उपलब्धता, भोजन की गुणवत्ता, वित्तीय उपयोगिता और विद्यालयवार संचालन की स्थिति की समीक्षा की गई. जानकारी दी गई कि जिले के 2,041 विद्यालयों में PM पोषण योजना के तहत नियमित रूप से मध्याह्न भोजन संचालित हो रहा है, जबकि 3,748 रसोइया इस योजना में अपनी सेवाएं दे रही हैं. उपायुक्त ने रसोइयों के सामाजिक सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिया कि सभी कार्यरत रसोइयों का आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड शत-प्रतिशत बनाया जाए. साथ ही 50 वर्ष या उससे अधिक आयु की पात्र रसोइयों को प्राथमिकता के आधार पर वृद्धावस्था पेंशन योजना से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सके. बैठक में उन चार प्रखंडों की भी समीक्षा की गई, जहां विद्यालयों में सेंट्रल किचन के माध्यम से मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है.

भोजन की गुणवत्ता से नहीं होगा समझौता
उपायुक्त ने भोजन की गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति, स्वच्छता और पोषण मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने यह भी कहा कि तिथि भोज के अवसर पर भी इन विद्यालयों में सेंट्रल किचन के माध्यम से विशेष और बेहतर गुणवत्ता का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा. उपायुक्त ने अधिकारियों को विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता, खाद्यान्न भंडारण, रसोईघर की स्वच्छता, पेयजल व्यवस्था और निर्धारित मेनू के पालन की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की कमी मिलने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. बैठक के अंत में उपायुक्त ने कहा कि PM पोषण शक्ति निर्माण योजना केवल भोजन उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि बच्चों के बेहतर पोषण, स्वास्थ्य, नियमित विद्यालय उपस्थिति और समग्र शैक्षणिक विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल है. उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मियों से समन्वय के साथ जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करते हुए प्रत्येक पात्र छात्र-छात्रा तक गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक मध्याह्न भोजन पहुंचाने की अपील की.
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