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हजारीबाग:  विस्थापन की पीड़ा, रोजगार का संकट और अधूरे वादे: आदिवासियों का फूटा आक्रोश, सांसद के दरबार में उठी हक की आवाज

Hazaribagh: मांडू विधानसभा क्षेत्र के विस्थापित आदिवासी गांवों की वर्षों पुरानी समस्याएं एक बार फिर मुखर होकर सामने आईं. रविवार को हजारीबाग...

Hazaribagh: मांडू विधानसभा क्षेत्र के विस्थापित आदिवासी गांवों की वर्षों पुरानी समस्याएं एक बार फिर मुखर होकर सामने आईं. रविवार को हजारीबाग सांसद सेवा कार्यालय में आयोजित बैठक में करीब दर्जनभर विस्थापित आदिवासी गांवों के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने सांसद मनीष जायसवाल के समक्ष पुनर्वास, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और सांस्कृतिक अस्तित्व से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया. घाटो मंडल सांसद प्रतिनिधि शंकर करमाली के नेतृत्व में चिराटुंगरी, भैलगाड़ा, लालटुंगरी, मकुंदाबेड़ा, उलाहारा, तापिन, तापिन बस्ती और जोड़ाकरम बस्ती सहित कई गांवों के ग्रामीण बैठक में शामिल हुए. ग्रामीणों ने कहा कि उद्योगों और खनन परियोजनाओं के कारण विस्थापन तो हुआ, लेकिन आज भी कई परिवार सम्मानजनक पुनर्वास और स्थायी रोजगार से वंचित हैं.

 घर उजड़े, लेकिन आज तक नहीं मिला सम्मानजनक पुनर्वास

ग्रामीणों ने सांसद के समक्ष मांग रखी कि विस्थापित परिवारों के लिए समुचित पुनर्वास नीति लागू की जाए. साथ ही प्रत्येक बस्ती में सड़क, बिजली, पेयजल, नाली, सामुदायिक भवन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जाए. ग्रामीणों ने सरना स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की मांग करते हुए कहा कि विकास के नाम पर उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान भी प्रभावित हो रही है, जिसे सुरक्षित रखना सरकार और कंपनियों की जिम्मेदारी है.

स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने पर भी उठी आवाज

बैठक में स्थानीय युवाओं को टाटा और सीसीएल सहित क्षेत्र के उद्योगों में प्राथमिकता के आधार पर स्थायी रोजगार देने की मांग प्रमुखता से उठी. ग्रामीणों ने कहा कि जिनकी जमीन गई, उनके परिवार आज भी रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं.

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सांसद बोले-टाटा, सीसीएल और ग्रामीणों की होगी आमने-सामने वार्ता

सांसद मनीष जायसवाल ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनने के बाद भरोसा दिलाया कि जल्द ही टाटा प्रबंधन, सीसीएल अधिकारियों और प्रभावित ग्रामीणों के बीच सीधी वार्ता कराई जाएगी, ताकि विस्थापन, पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का ठोस समाधान निकल सके.

राज्य सरकार पर साधा निशाना

बैठक के दौरान सांसद मनीष जायसवाल ने झारखंड सरकार पर भी हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार आदिवासियों के उत्थान के लिए लगातार योजनाएं चला रही है, जबकि राज्य की झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार आदिवासियों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी है. उन्होंने दावा किया कि आदिवासी समाज को इसका जवाब जनता आने वाले समय में देगी.

बैठक के बाद सुनी ‘मन की बात’

बैठक समाप्त होने के बाद सांसद मनीष जायसवाल और सभी उपस्थित ग्रामीणों ने सांसद सेवा कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का सामूहिक श्रवण भी किया. बैठक में सांसद प्रतिनिधियों, भाजपा पदाधिकारियों तथा मांडू विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

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