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झारखंड : 94.76 % मौतों का कोई कारण नहीं, बढ़ रही है अनसुलझे मौतों की फेहरिस्त

Ranchi : झारखंड में मौत के पीछे की असली वजह क्या है? यह सवाल आज भी राज्य के स्वास्थय तंत्र के लिए...

अनसुलझी मौतों

Ranchi : झारखंड में मौत के पीछे की असली वजह क्या है? यह सवाल आज भी राज्य के स्वास्थय तंत्र के लिए एक बड़ा रहस्य बना हुआ है. अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित हर 100 मौतों में से लगभग 95 मौतों के कारण का कोई स्पष्ट उल्लेख ही नहीं है. पिछले डेढ़ से दो साल में राज्य में कुल 1,25,423 मौतें दर्ज की गई थी. इनमें से केवल 35,520 मामलों में ही चिकित्सकों द्वारा मृत्यु का प्रमाण-पत्रजारी किया गया. चौंकाने वाली बात यह है कि इन प्रमाणित मौतों में से 33,658 मौतें अनस्पेसिफाइड श्रेणी में दर्ज हैं. यानी, 94.76 प्रतिशत मामलों में यह पता ही नहीं चल सका कि व्यक्ति की जान किस बीमारी या कारण से गई.

किन बीमारियों से कितने फीसदी लोगों की हुई मौत

  • संक्रामक और परजीवी रोग के कारण 1.47 की मौत हुई. इसमें 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं.
  • सांस संबंधी बीमारियों से 0.54 फीसदी की मौत हुई. इसमें 158 मौतें 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में दर्ज की गई हैं.
  • मूत्रजनन प्रणाली के रोग के कारण 0.55 फीसदी मौत हुई. इसमें 45 साल से अधिक उम्र के लोग शामिल हैं.
  • दुर्घटनाओं, चोट या जहर जैसे बाह्य कारणों से 0.735 फीसगी मौत दर्ज की गई.
  •  कैंसर और नियोप्लाज्म जैसी बीमारियों से 114 लोगों की मृत्यु हुई है, जिनमें से 85 मौतें 45 से अधिक उम्र के लोगों की थीं.
  •  न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से 136 लोगों की जान गई.

45 पार की स्थिति सबसे विकट

रिपोर्ट के अनुसार मृत्यु दर में 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग सबसे अधिक संवेदनशील है. लगभग हर बीमारी के मामले में, चाहे वह श्वसन हो, मूत्र प्रणाली हो या संक्रामक रोग, सबसे अधिक मौतें 45 वर्ष से ऊपर के लोगों की हुई हैं. विशेष रूप से अनस्पेसिफाइड मौतों का बड़ा हिस्सा भी इसी आयु वर्ग में सिमटा हुआ है, जो दिखाता है कि वृद्धावस्था में स्वास्थ्य सुविधाओं और स्क्रीनिंग की कितनी कमी है.

पुरुषों में जोखिम अधिक

मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित मौतों में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में काफी अधिक है. कुल प्रमाणित मौतों में से 64.47 % मामले पुरुषों के हैं. जबकि 35.53 % मामले महिलाओं के हैं. यह आंकड़ा प्रति 1000 पुरुष मृत्यु पर 526 महिला मृत्यु का अनुपात दर्शाता है. हालांकि, संक्रामक और परजीवी रोगों में महिलाओं की मृत्यु संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक है.

 

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