Business Desk: गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 900 अंक तक गिर गया और निफ्टी भी 23,600 के नीचे पहुंच गया. अचानक आई इस गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई और बाजार में हल्की घबराहट का माहौल दिखाई दिया. इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मानी जा रही हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल खरीदकर पूरा करता है, इसलिए तेल महंगा होने का असर यहां की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर पड़ता है.

जाने क्यों गिरा बाजार
बाजार के जानकारों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. जब तेल महंगा होता है तो महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे निवेशक सतर्क हो जाते हैं.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालना शुरू किया है. जब बड़े निवेशक शेयर बेचते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है.
वैश्विक अनिश्चितता
दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते तनाव और आर्थिक अनिश्चितता का असर भी बाजार पर दिखाई दे रहा है. इससे निवेशकों का भरोसा थोड़ा कमजोर पड़ा है.
किन सेक्टरों पर असर
इस गिरावट का असर कई सेक्टरों में देखने को मिला.
•बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर के शेयर दबाव में रहे
•ऑटो और मेटल कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई
•तेल और गैस कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी दिखी
जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं. इसी वजह से कई सेक्टरों में एक साथ गिरावट देखने को मिली.
क्या यह निवेश का मौका हो सकता है
कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गिरावट लंबे समय के निवेशकों के लिए मौका भी बन सकती है. मजबूत कंपनियों के शेयर गिरने पर सस्ते मिल सकते हैं, जिससे आगे चलकर फायदा हो सकता है.
क्या कहते इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंट
इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंट आसिफ इकबाल का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. उनके मुताबिक निवेशकों को अभी जल्दबाजी में नए निवेश से थोड़ा रुकना चाहिए और बाजार को स्थिर होने देना चाहिए. जब बाजार थोड़ा संभल जाए तब निवेश करना बेहतर रहेगा.वे आगे कहते हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों को भारत की आर्थिक कहानी पर भरोसा रखना चाहिए और ऐसी भारतीय कंपनियों में निवेश करना चाहिए जिनका कारोबार मुख्य रूप से घरेलू बाजार से जुड़ा हो. आसिफ इकबाल के मुताबिक,डिफेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, कंजम्प्शन और मेटल सेक्टर में गिरावट आने पर चरणबद्ध तरीके से निवेश किया जा सकता है. साथ ही वे निवेशकों को सलाह देते हैं कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच घबराकर अपने SIP बंद नहीं करने चाहिए. नियमित निवेश जारी रखना लंबे समय में बेहतर रिटर्न दे सकता है.
इस बीच जागरण बिजनेस (नेशनल) की कंसल्टिंग एडिटर गीतू मोज़ा का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार पर कई वैश्विक कारणों का दबाव है उनके मुताबिक,
ईरान युद्ध की आशंकाओं के कारण शेयर बाजारों में बिकवाली देखी जा रही है और निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं. निफ्टी अपने उच्चतम स्तर से करीब 10 प्रतिशत तक गिर चुका है और फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. इसी बीच रुपया भी डॉलर के मुकाबले नए निचले स्तर पर पहुंच गया है और कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई हैं, जिससे बाजार की धारणा पर दबाव बढ़ा है. वे आगे कहती हैं,
निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की जरूरत है और बाजार थोड़ा स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए. उसके बाद ही नए निवेश के बारे में फैसला लेना बेहतर होगा.
आगे बाजार कैसा रहेगा
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगी. अगर तेल के दाम स्थिर होते हैं और वैश्विक तनाव कम होता है तो बाजार में फिर से तेजी आ सकती है.
फिलहाल बाजार में थोड़ा अनिश्चित माहौल बना हुआ है और निवेशक दुनिया भर की खबरों पर नजर रखे हुए हैं.

