Hazaribagh: झारखंड में मानसून की दस्तक होते ही हजारीबाग नगर निगम क्षेत्र और बरकट्ठा विधानसभा की बुनियादी व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है. सड़कों पर समंदर जैसा नजारा, जानलेवा गड्ढे और ग्रामीण इलाकों में आधी रात को होने वाले जंगली हाथियों के हिंसक हमलों ने आम जनता की रातों की नींद उड़ा दी है. इस प्रशासनिक विफलता और जनता की बेबसी को देखकर यूथ कांग्रेस का गुस्सा भड़क उठा है. यूथ कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष और बरकट्ठा की युवा विधानसभा अध्यक्ष संगीता कुमारी ने स्थानीय सांसद, विधायक, महापौर और पार्षदों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है.
तालाब बनीं शहर की मुख्य सड़कें: ‘बेमिसाल‘ दावों के बीच बंद पड़े हैं करोड़ों के वाटर एटीएम
यूथ कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष ने हजारीबाग नगर निगम क्षेत्र की बदहाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जनता ने जिन जनप्रतिनिधियों को अपनी किस्मत बदलने के लिए चुना था, आज वही जनता को समस्याओं के दलदल में धकेलकर गायब हैं. नवाबगंज रोड, खीरगांव और वार्ड नंबर 24 (विष्णुपुरी) की हालत यह हो चुकी है कि पहली बारिश में ही ये इलाके टापू बन गए हैं. सड़कों के गहरे गड्ढों में गाड़ियां फंस रही हैं और राहगीर हादसों का शिकार हो रहे हैं. स्थानीय सांसद मनीष जायसवाल और सदर विधायक को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि सांसद अपने दो साल के कार्यकाल को ‘बेमिसाल’ बताकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन धरातल की सच्चाई बेहद कड़वी है. चुनाव और खोखले आंदोलनों के समय बाहर निकलने वाले ये नेता आज जनता के आंसुओं पर खामोश हैं. शहर में लाखों-करोड़ों की लागत से खोले गए ‘वाटर एटीएम’ आज कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं, जिससे इस उमस भरी गर्मी और बरसात में जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है. यूथ कांग्रेस अब चुप नहीं बैठेगी. प्रदेश उपाध्यक्ष खुद पम्फलेट लेकर सभी 36 वार्डों की खाक छानेंगी और सोशल मीडिया पर जारी किए गए नंबर के जरिए सीधे जनता की शिकायतें इकट्ठा कर एक उग्र जनांदोलन की शुरुआत करेंगी.

बरकट्ठा में हाथियों का खौफनाक तांडव और जर्जर रास्ते
इधर, बरकट्ठा की युवा कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष संगीता कुमारी ने क्षेत्र की उन डरावनी हकीकतों को उजागर किया जिसे देखने की फुर्सत सत्तासीनों को नहीं है. चंदा से दरिया जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित दरिया तालाब के पास की सड़क पूरी तरह जमींदोज हो चुकी है, वहीं धेपाई से काला जाने वाला रास्ता भी किसी दुःस्वप्न जैसा उबड़-खाबड़ है. सबसे बदतर हालत इचाक स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के पास की है, जहां घुटनों तक भरे गंदे पानी और कीचड़ के बीच से गुजरने को यहां की मासूम छात्राएं मजबूर हैं. इससे भी ज्यादा खौफनाक मंजर चलकुसा के कूटू जंगल क्षेत्र का है. यहां जंगली हाथियों का झुंड लगातार आबादी वाले इलाकों में घुसकर तांडव मचा रहा है. हाथियों के इस आतंक ने गरीबों के मिट्टी के आशियानों को मलबे में तब्दील कर दिया है. लोग इस कड़कड़ाती बिजली और बारिश के बीच तिरपाल और करकट के नीचे दुबक कर रातें काटने को मजबूर हैं. संगीता कुमारी ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब वे और पीड़ित ग्रामीण इस तबाही की सूचना देने के लिए कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी और बरकट्ठा विधायक अमित यादव को फोन करते हैं, तो ये माननीय फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझते.
राजनीति छोड़ गरीबों को पक्का मकान दें जनप्रतिनिधि
संगीता कुमारी ने क्षेत्र की आर्थिक बदहाली पर बात करते हुए कहा कि आज के दौर में बालू, ईंट और गिट्टी के दाम सातवें आसमान पर पहुंच चुके हैं. एक गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार के लिए अपने दम पर पक्के मकान की एक दीवार खड़ी करना भी नामुमकिन हो गया है. ऐसे समय में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ सीधे पात्र और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचना चाहिए था, ताकि इस बेरहम बरसात में किसी भी गरीब को तिरपाल के नीचे भीगते हुए रात न गुजारनी पड़े. उन्होंने सांसद और विधायक को अपनी आख़िरी चेतावनी में कहा कि वे तुच्छ राजनीति को छोड़कर बरकट्ठा और कोडरमा के विकास पर ध्यान दें, वरना युवा कांग्रेस इस बार व्यवस्था को घुटनों पर लाने के लिए सड़कों पर ऐसा उग्र प्रदर्शन करेगी जिसकी गूंज रांची से दिल्ली तक सुनाई देगी.
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